संस्कृत पाठ्यक्रम से पढ़ने वाले विद्यार्थियों के अच्छे दिन आ गए हैं यह कहना है बाबा रामदेव का। रामदेव ने बताया कि केंद्र सरकार ने गुरुकुल और संस्कृत महाविद्यालयों से पढ़कर निकलने वाले विद्यार्थियों को बीएमएस करने की सुविधा प्रदान कर दी है।
वहीं एमबीबीएस डाक्टर भी अगर आयुर्वेद की शिक्षा लेना चाहेंगे तो उनके लिए आयुष मंत्रालय ने एक वर्ष के डिप्लोमा कोर्स को मान्यता दे दी है।
वहीं, परिषद से जुड़े वेदप्रकाश त्यागी ने बताया कि शुक्रवार को आयुष मंत्रालय ने उनकी सालों से लंबित मांग पूरी कर दी है।
उनका कहना है कि संहिताओं और पुरानी किताबों में आयुर्वेद से जुड़ी अधिकतर जानकारियां संस्कृत में हैं जबकि अभी तक संस्कृत से डिग्री लेने वाला बीएमएस नहीं कर सकता था।
आयुर्वेद पर रिसर्च वर्क में भी संस्कृत की उपयोगिता है। ऐसे में संस्कृत पढ़कर आने वाले आयुर्वेद के विकास में अधिक प्रभावशाली होंगे। अब मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को पास कर दिया है।
संस्कृत के जो छात्र बीएमएस करेंगे उन्हें एक साल भौतिक, रसायन और गणित की शिक्षा भी दी जाएगी। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद के बढ़ते प्रभाव और एमबीबीएस डाक्टरों के रुझान को देखते हुए उनके लिए एक साल का डिप्लोमा इन आयुर्वेद कोर्स भी शुरू किया है।