बुलंदशहर सामूहिक दुष्कर्म पीड़ित मां-बेटी ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है कि मुकदमे को दिल्ली ट्रांसफर करने के साथ ही उत्तर प्रदेश के मंत्री आजम खान और लापरवाह पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए।
हाईवे-91 पर 29 जुलाई को हुई इस घटना के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी खुद मामले की जांच पर निगरानी रखने का फैसला किया था और इसकी सीबीआई जांच कराने का आदेश दिया था।
पीड़ित पक्ष की ओर से वकील किसलय पांडेय ने दायर याचिका में पुलिसकर्मियों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। याचिका में महिला के पति ने मांग की है कि दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ितों को उचित न्याय दिलाने के लिए इस मामले को बुलंदशहर से दिल्ली ट्रांसफर किया जाए।
याचिका में कहा गया है कि उस जगह पर पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, इसके बावजूद इस मामले में पुलिस का रवैया लापरवाही भरा रहा। याचिका में कहा गया कि जिस जगह इस पूरी वारदात को अंजाम दिया गया, वह पुलिस चौकी से महज 100 मीटर की दूरी पर था। घटना के बारे में 100 नंबर पर पुलिस को सूचना भी दी गई थी, लेकिन पुलिस के पहुंचने तक लुटेरे भाग चुके थे।
लिहाजा दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। याचिका में मामले की जांच की स्थिति रिपोर्ट तलब करने की गुहार की गई है। साथ ही गुहार की गई है कि अदालत की निगरानी में मामले की जांच कराई जाए।
मालूम हो कि गत 29 जुलाई को एक परिवार कार से नोएडा से शाहजहांपुर जा रहा था। रात करीब डेढ़ बजे बुलंदशहर के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर लुटेरों ने छल से कार रुकवाई और बंदूक की नोक पर न केवल उनके नगदी और जेवर लूट लिए बल्कि 32 वर्षीय महिला और उसकी नाबालिग बेटी के साथ बलात्कार भी किया।
आजम पर भी हो एफआईआर
याचिका में कहा गया है कि इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री आजम खान का बयान महिला की अस्मिता को नुकसान पहुंचाने वाला था। उन्होंने सामूहिक दुष्कर्म के संवेदनशील मामले को ‘राजनीतिक साजिश’ करार देकर महिला की अस्मिता का क्रूर मजाक उड़ाया है।
लिहाजा आजम खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। शीर्ष अदालत से गुहार लगाई गई है कि राज्य सरकार, डीजीपी सहित अन्य जिम्मेदार पक्षों से पीड़ितों को उचित मुआवजा दिलाया जाए और उनके जीने के मौलिक अधिकारों की रक्षा की जाए। इसके लिए नाबालिग पीड़ित को उच्च शिक्षा मुहैया कराने और उसे उचित संरक्षण देने की मांग की गई है।