शरद पवार की अगुआई वाली एनसीपी इस साल की शुरुआत में विधान परिषद में खाली पड़ी राज्यपाल कोटे की दोनों सीटों पर दावा ठोक चुकी है। ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार में शिवसेना और कांग्रेस के साथ एनसीपी भी शामिल है। एनसीपी ने राज्यपाल को दोनों सीटों के लिए दो नाम भी भेजे थे। हालांकि राज्यपाल कोश्यारी ने यह कहते हुए एनसीपी की मांग खारिज कर दी थी कि दोनों सीटों का कार्यकाल जून में खत्म हो रहा है, ऐसे में तत्काल किसी नियुक्ति की आवश्यकता नहीं है।
उत्तर प्रदेश में आ चुका है ऐसा मामला सामने
उत्तर प्रदेश में भी महाराष्ट्र जैसी ही परिस्थिति सामने आ चुकी है, जब चंद्रभान गुप्ता के 1961 में मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्यपाल ने उन्हें अपने कोटे से विधान परिषद में नामित किया था। राज्यपाल के इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था और गुप्ता मुख्यमंत्री पद पर बरकरार रहे थे। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि गुप्ता सालों से सक्रिय राजनीति का हिस्सा रहे हैं और उनके पास सामाजिक सेवा का भी पर्याप्त अनुभव है। इसके चलते वह विधान परिषद का सदस्य नामित करने के लिए पूरी तरह योग्य हैं।
क्या हैं उद्धव के सामने विकल्प
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महाराष्ट्र सरकार चुनाव आयोग से 27 मई से पहले 9 विधान परिषद सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव कराने का आग्रह कर सकती है
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राज्य सरकार 9 अप्रैल की कैबिनट सिफारिश पर जल्द से जल्द निर्णय लिए जाने का आग्रह राज्यपाल से कर सकती है
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राज्य सरकार इस सिफारिश पर राज्यपाल को स्पष्ट निर्देश जारी कराने के लिए हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जा सकती है
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राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के उन पूर्ववर्ती निर्णयों का हवाला दे सकती है, जिनमें कैबिनेट सिफारिशों को राज्यपाल के लिए अनिवार्य माना गया है
(विधानसभा सचिवालय के पूर्व प्रमुख सचिव व संविधान विशेषज्ञ अनंत कलसे के मुताबिक)