कांग्रेस के करीबी माने जाते हैं अमिताभ बच्चन
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कुछ लोग कभी विवादों में नहीं पड़ना चाहते। ऐसे लोग हमेशा सुरक्षित रहना चाहते हैं। सुपरस्टार अमिताभ बच्चन भी चुप रहने की कला सीख चुके हैं। 70 के दशक के एंग्री यंग मैन विवादों में नहीं पड़ने को लेकर इतनी सावधानी बरतते हैं जैसे एक-एक शब्द तोल कर बोल रहे हों। वह भी उस दौर में जब बॉलीवुड के कलाकारों के बीच विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर राय देने का चलन बढ़ा है। इसका एक उदाहरण है- भारतीय टीवी की दुनिया में सबसे ज्यादा सवाल पूछने वाले एंकरों में शुमार अर्णब गोस्वामी के साथ 31 मई, 2015 को अमिताभ बच्चन की बातचीत।
(ये बातचीत उस इंटरव्यू का ट्रांसक्रिप्शन है।)
अर्णब गोस्वामी- लोगों को कहा जा रहा है कि वे बीफ नहीं खा सकते, वे बीफ का इस्तेमाल नहीं कर सकते और ना ही बीफ को महाराष्ट्र ला सकते हैं।
अमिताभ बच्चन- क्या ऐसा कोई कानून है? क्या ऐसा कोई कानून पारित हुआ है?
बच्चन- वास्तव में? मैं तो शाकाहारी हूं, मैं इसका।।।
अर्णब गोस्वामी- सर, सवाल को टालिए नहीं।
बच्चन- सॉरी?
अर्णब गोस्वामी- टालिए मत।
बच्चन- नहीं, नहीं, गंभीरता से कह रहा हूं, मैं वास्तव में नहीं जानता कि मुद्दा क्या है।
इस जवाब से अर्णब के साथ साथ कई दर्शकों को अमिताभ पर अविश्वास हुआ होगा।
क्योंकि जो अभिनेता इतने अलग अलग मुद्दों पर अपने ब्लॉग और सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं, उन्हें अपने राज्य महाराष्ट्र में बीफ पर लगी पाबंदी के बारे में जानकारी कैसे नहीं है?
इस पाबंदी के बारे में जानकारी नहीं होने की बात के तुरंत बाद अमिताभ बच्चन ने ये भी कहा- अगर ऐसा कोई कानून पास हुआ है, तो उसका पालन करना चाहिए।
साक्षात्कार में कन्ना काटते नजर आए
गुजरात सरकार के ब्रांड अम्बेसडर हैं अमिताभ
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अर्णब बच्चन के जवाब पर लगातार निराशा जाहिर करते रहे, तो अमिताभ ने कहा कि 73 साल की उम्र में शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहते हैं। हो सकता है कि अमिताभ अपने किसी तबके के फैंस को नाराज नहीं करना चाहते हों, लेकिन दिल्ली के राजनीतिक गलियारों के पुराने लोग अमिताभ के रवैए से अचरज में नहीं पड़े। 1970 के दशक से अमिताभ के करियर को देखने वाले लोगों को मालूम है कि वे हमेशा सार्वजनिक और राजनीतिक मसलों पर साहस के बदले विवेक से काम लेते रहे हैं।
अर्णब के एक सवाल के जवाब में अमिताभ ने कहा कि उन्हें आपातकाल को लेकर आक्रोश महसूस नहीं हुआ था लेकिन तुरंत ये भी कहते हैं कि संभवत ये गलत फैसला था। वे अर्णब के साथ इस बात पर भी सहमत हो गए कि बॉलीवुड के तमाम कलाकार और वे खुद, नियम बना चुके हैं कि सत्ता में जो है उसे अपसेट नहीं करना है। फिर अर्णब ने बोफोर्स विवाद के बारे में सवाल पूछा। इस विवाद के चलते ना केवल राजीव गांधी की सत्ता चली गई थी बल्कि अमिताभ के साथ उनकी दोस्ती भी टूट गई थी। इस सवाल के जवाब में अमिताभ बोले कि मीडिया ने किस तरह होवित्जर सौदे में रिश्वत के आरोप लगाकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश की थी।
अमिताभ बच्चन ने ये भी कहा कि वे लोगों को ये सलाह देते रहे हैं कि सत्ता प्रतिष्ठानों के साथ मतभेद नहीं रखें, साथ ही वे ये भी बताते रहे कि वे हमेशा एपोलिटिकल रहे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 1985 से 1987 के छोटे अंतराल के बीच संसद सदस्य रहने के अलावा वे हमेशा अराजनीतिक रहे। लेकिन उनके जीवन पर नजदीक से नजर डालने पर ये पता चलता है कि उनकी नियति राजनीति और राजनेताओं से इस कदर उलझी है कि अपने जीवन के शुरुआती दिनों से लेकर अब तक अमिताभ उसेसे अलग नहीं हो सकते। यह इससे भी समझा जा सकता है कि जब अमिताभ बच्चन गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री और अब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े तो सोनिया गांधी सहित कांग्रेसी नेता क्यों नाराज हुए थे।
राजनीति की जगह अभिनय का किया चुनाव
राजीव गांधी के अच्छे दोस्त थे अमिताभ
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सामाजिक कार्यकर्ता और नृत्यांगना मलिका साराभाई ने नरेंद्र मोदी के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि अमिताभ का गुजरात से जुड़ाव विभिन्न वजहों पर आधारित था। अमिताभ ने साराभाई के आरोपों को जवाब देने लायक नहीं समझा। लेकिन उन्होंने एक लेखक से ये बताया था कि उन्होंने राजनीति क्यों छोड़ी। उन्होंने ये याद किया कि किस तरह से असम में उनके प्रशंसक ने उनसे कहा था कि वह उन्हें बहुत प्यार करता है लेकिन उनके कांग्रेस के साथ जुड़ाव को नापसंद करता है। उस प्रशंसक ने उनसे लगभग गुहार लगाई थी, मुझे दो में से एक को चुनने के लिए बाध्य नहीं करें।
कई लोगों के दिमाग में ये सवाल भी उठ रहा होगा कि अमिताभ अपने उन लाखों प्रशंसकों के बारे में क्या सोचते हैं जो नरेंद्र मोदी को संदेह की नजर से देखते हैं। जो कांग्रेसी पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की सोच से वाकिफ हैं, वो जानते हैं कि विभिन्न राजनीतिक सत्ता प्रतिष्ठानों से अमिताभ की गलबाहियां सोनिया गांधी को खुश तो नहीं करेंगी। क्योंकि सोनिया गांधी का भरोसा प्रतिबद्ध और लंबे समय से भरोसेमंद दोस्तों पर ज्यादा रहा है।