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सिगरेट की डिब्बियों पर चेतावनी छापने के मामले में भारत से कहीं बेहतर हैं पड़ोसी देश

Mon, 16 Jul 2018 07:55 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। यह कैंसर का कारण है। यह बात सब जानते हैं, लेकिन लत ऐसी लग जाती है कि लोग उसे चाहकर भी छोड़ नहीं पाते। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने सिगरेट और तंबाकू उत्पाद (पैकेजिंग और लेबलिंग) कानून, 2008 में अप्रैल में संशोधित किया था। जिसके तहत अब भारत में सिगरेट और तंबाकू उत्पादों के नए पैकेट पर एक हेल्पलाइन नंबर लिखा जाएगा और उसके साथ ही चित्रात्मक और लिखित चेतावनी जारी की जाएगी। यह चेतावनी पैकेट के 85 प्रतिशत हिस्से को कवर करेगी।

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इसके अलावा कैंसर पीड़ित लोगों को भी इसमें प्रदर्शित किया जाएगा। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि लोगों का ध्यान उन चित्रों और चेतावनी पर जाए और वो उसे अच्छी तरह पढ़कर-समझकर अमल में लाएं, जिससे सिगरेट और तंबाकू से होने वाली गंभीर बीमारियों पर काबू पाया जा सके।

धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है

धूम्रपान और तंबाकू का सेवन सिर्फ और सिर्फ मौत का ही कारण बनता है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद् की रिपोर्ट के मुताबिक, तंबाकू और इससे होने वाली बीमारियों से भारत में हर साल दस लाख लोगों की मौत हो जाती है। वहीं, धूम्रपान की वजह से करीब 45 लाख लोग हर साल मौत के मुंह में चले जाते हैं। इनमें ज्यादातर लोग दिल की बीमारियों के शिकार होते हैं, जिनकी उम्र 40 साल से भी कम होती है। रिपोर्ट की मानें तो वर्ष 2020 तक 15 लाख लोग हर साल तंबाकू की वजह से अपनी जान गंवा देंगे। फिलहाल इसकी वजह से होने वाली बीमारियों के इलाज में 16,800 करोड़ रुपये की एक भारी-भरकम राशि खर्च हो जाती है।

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चित्रात्मक और लिखित चेतावनी के मामले में भारत से बेहतर हैं पड़ोसी देश

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक सिगरेट के पैकेट पर 50 प्रतिशत या उससे ज्यादा हिस्से पर चेतावनी जारी की जानी चाहिए, जबकि भारत में सिगरेट के पैकेट का 20 प्रतिशत हिस्सा ही चेतावनी के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सिगरेट के पैकेट पर फोटोसहित चेतावनी छापने वाले देशों की रैंकिंग में भारत 136वें स्थान पर है। इस मामले में भारत के पड़ोसी देश उससे काफी बेहतर हैं।

नेपाल में सिगरेट के पैकेट के 75 फीसदी हिस्से पर चेतावनी दी हुई होती है, जबकि श्रीलंका में 60 फीसदी, पाकिस्तान में 40 फीसदी और चीन में 30 फीसदी हिस्से पर चेतावनी प्रकाशित होती है। इस मामले में थाईलैंड पहले पायदान पर है। वहां सिगरेट के पैकेट के 85 फीसदी हिस्से पर चेतावनी दी गई होती है। वहीं ऑस्ट्रेलिया में भी 82.5 फीसदी हिस्से पर चेतावनी होती है। 

युवाओं पर चेतावनी का कोई असर नहीं होता : सुप्रीम कोर्ट

सिगरेट के पैकेट पर कंपनियां चाहे कितनी भी बड़ी तस्वीर या चेतावनी जारी करें, लेकिन युवाओं पर इन चेतावनियों का कोई असर नहीं होता। यह बात सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में एक सुनवाई के दौरान कहा था। जस्टिस पीसी घोष की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि ये तस्वीरें छापने से युवाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। वो इसकी परवाह नहीं करते हैं।

ब्रिटेन में सादे पैकेट में मिलती है सिगरेट

ब्रिटेन में सिगरेट की पैकिंग पर कोई ब्रांडिंग नहीं होती है। सभी कंपनियों के सिगरेट गहरे भूरे रंग के पैकेट में बेचे जाते हैं। ये नियम साल 2016 में प्रभावी हुआ था। हालांकि इस नियम के तहत सिगरेट कंपनियों को अपने पुराने स्टॉक खत्म करने के लिए एक साल का समय दिया गया था। 20 मई, 2017 के बाद सिगरेट की डिब्बियों से हर तरह की ब्रांडिंग और लोगो को हटा दिया गया था।

क्यों हटाया गया था सिगरेट के पैकेट से ब्रांडिंग और लोगो

दरअसल, एक सर्वे में ये बात सामने आई थी कि सिगरेट के पैकेट जितने आकर्षक होते हैं, उतने ही लोग (खासकर युवा) उसकी तरफ आकर्षित होते हैं। इसका असर ये होता है कि युवा आसानी से धूम्रपान करने लगते हैं और बाद में चलकर सिगरेट की उन्हें लत लग जाती है। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए ब्रिटेन सरकार द्वारा ये आदेश जारी किया गया था कि वहां सिगरेट की डिब्बियों पर न तो कोई चित्र होगा और न ही किसी कंपनी का नाम होगा।
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हानिरहित तंबाकू के विकल्प की तलाश जारी

सरकार कभी ना कभी सिगरेट और तंबाकू पर प्रतिबंध लगा सकती है, इसका डर हमेशा कंपनियों पर बना रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए कई सिगरेट कंपनियों ने ऐसे तंबाकू की खोज करनी शुरू कर दी है जो हानिरहित हो, जो जिंदगी के लिए खतरनाक न हो। सिगरेट कंपनी फिलिप मॉरिस ने तो इसमें सफलता भी हासिल कर ली है। वैज्ञानिकों ने हानिरहित तंबाकू के विकल्प की तलाश कर ली है। इसे आईक्यूओएस (आई क्विट ऑर्डिनेरी स्मोकिंग) नाम दिया गया है। हालांकि, जापान और यूरोप के कुछ हिस्सों में ये पहले से ही प्रचलित है।

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