सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को उस याचिका पर परीक्षण करने के लिए तैयार हो गया जिसमें ‘वरिष्ठ वकील’ पदनाम देने के लिए वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का प्रभावी क्रियान्वयन का निर्देश देने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने अक्तूबर 2017 के अपने फैसले में वकीलों को वरिष्ठ पदनाम देने के लिए सीजेआई की अध्यक्षता में स्थायी समिति के गठन करने के अलावा कई दिशा-निर्देश जारी किए थे।
जस्टिस रोहिंग्टन एफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह की ओर से दायर इस आवेदन पर सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल को नोटिस जारी किया है। जयसिंह ने अपने आवेदन में कहा, कोर्ट के आदेश के मुताबिक 6 अगस्त 2018 को दिशा निर्देश प्रकाशित हुए थे।
इसके तहत जनवरी 2019 से प्रक्रिया शुरू होनी थी, लेकिन चार छमाही बीतने के बाद भी इस संदर्भ में आवेदन की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की ओर से न कोई सूचना जारी की गई और न ही इस प्रक्रिया की शुरुआत हुई। उन्होंने कोविड-19 महामारी के कारण अदालत में हो रही ऑनलाइन सुनवाई का हवाला देते हुए कहा गया कि वरिष्ठ वकीलों के पदनाम देने की प्रक्रिया भी इसी प्रकार से की जा सकती है।