गर्भवती महिला को नौकरी के लिए अस्थायी रूप से अयोग्य करार देने पर दिल्ली महिला आयोग ने इंडियन बैंक को नोटिस जारी किया है। आयोग ने बैंक से इससे संबंधित दिशा निर्देश वापस लेने को कहा है। साथ ही इस मामले में की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट 23 जून तक जमा करने को कहा है। बैंक के इस कदम की विभिन्न संगठनों ने भी कड़ी आलोचना की है, लेकिन उसने अभी तक इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
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जनवरी में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने भी इसी प्रकार के नियम लागू किए थे। नियमों के तहत तीन माह से अधिक अवधि की गर्भवती महिला उम्मीदवारों को ‘अस्थायी रूप से अयोग्य’ माने जाने की बात कही गई थी। इस प्रावधान को श्रमिक संगठनों और दिल्ली महिला आयोग समेत समाज के कई तबकों ने महिला-विरोधी बताते हुए निरस्त करने की मांग की थी। इसके बाद एसबीआई को इस नियम को ठंडे बस्ते में डालना पड़ा था।
अपने नोटिस में कहा, इंडियन बैंक का यह कदम भेदभावपूर्ण और अवैध है क्योंकि यह सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत प्रदान किए गए मातृत्व लाभों के विपरीत है। उसने कहा, इसके अलावा, यह लिंग के आधार पर भेदभाव करता है जो भारत के संविधान के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों के खिलाफ है।
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आयोग ने एक बयान में कहा, इस संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक को भी पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने की मांग की गई है। आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कहा, पैनल ने इंडियन बैंक द्वारा कर्मचारियों की भर्ती के नए दिशा-निर्देश जारी किये जाने संबंधी मीडिया रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लिया है।