केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने मुंबई में भारतीय मौसम विभाग के मुख्य जन सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) को आरटीआई आवेदन शुल्क पर
कार्यकर्ता को सूचना उपलब्ध कराने के एवज में जीएसटी लगी शुल्क का अग्रिम भुगतान करने को कहा था। पांच फरवरी के आदेश में सीआईसी ने कहा कि सीपीआईओ की ओर से जीएसटी चुकाने को कहना ‘अवैध और अनुचित’ है। कोई जन अधिकारी किसी सूचना को बिक्री योग्य वस्तु या सेवा की प्रकृति का बताते हुए उसके लिए मूल्य निर्धारित नहीं कर सकता।
आरटीआई कार्यकर्ता चेतन कोठारी ने नौ सितंबर, 2017 को आरटीआई दाखिल करते हुए मौसम विभाग की ओर से जारी किए जाने वाली चेतावनी/रेड अलर्ट का ब्यौरा मांगा था। इसमें ऐसी भारी बारिश, भूकंप, चक्रवात आदि के लिए ऐसी चेतावनी/रेड अलर्ट का कारण, इन्हें जिन जगहों के लिए जारी किया गया, उनका नाम और ये सही साबित हुई या गलत, इसकी जानकारी मांगी गई थी।
कोठारी के मुताबिक, जब उन्होंने यह सूचना मांगी तो सीपीआईओ बिश्वम्बर ने पहले तो आवेदन अधूरा होने की बात कही। जब मैंने ई-मेल से अपनी स्थिति स्पष्ट की तो दो नवंबर, 2017 तक मुझे 5,808 रुपये जमा करने को कहा गया। इसमें 886 रुपये जीएसटी के थे, जिसका अग्रिम भुगतान करने को कहा गया था।
उन्होंने कहा, जब मुझे जीएसटी चुकाने को कहा गया तो मैं स्तब्ध रह गया, क्योंकि यह कभी भी वस्तु या सेवा की श्रेणी में नहीं था। कोठारी के अनुसार, जब उन्होंने अपनी पहली अपील में इसे चुनौती दी तो आवेदन को खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने दूसरा आवेदन दर्ज करने का फैसला किया। सीआईसी एम श्रीधर आचार्युलु ने 5 फरवरी को इस आवेदन की सुनवाई करते हुए कहा कि जीएसटी मांगना न केवल अवैध है, बल्कि अनुचित भी है।
अपने तीन पन्नों के आदेश में आचार्युलु ने कहा, इस तरह जीएसटी लगाना कानूनी तौर पर सही नहीं है। जन अधिकारी किसी सूचना को बेचने योग्य प्रकृति का ठहराते हुए इसके लिए कीमतें तय नहीं कर सकते। आयोग ने सीपीआईओ को 5 मार्च को होने वाली सुनवाई में जवाब देने को कहा गया है।