प्रसिद्ध मलयालम साहित्यकार, फिल्मकार और ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता एमटी वासुदेवन नायर (91) नहीं रहे। उन्हें सांस लेने में दिक्कत और दिल का दौरा पड़ने के बाद 15 दिसंबर को कोझिकोड के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां बुधवार रात 10 बजे उन्हाेंने अंतिम सांस ली।
नायर को साहित्यिक कार्यों के लिए मिले कई सम्मान
साहित्य अकादमी पुरस्कार, पद्म भूषण और अमर उजाला शब्द सम्मान के सर्वोच्च अलंकरण ‘आकाशदीप’ से सम्मानित नायर एमटी के नाम से लोकप्रिय रहे। उनका जाना, मलयालम साहित्य, संस्कृति और फिल्म जगत के लिए आघात है। उन्होंने मलयालम सिनेमा पर भी अमिट छाप छोड़ी। करीब 54 फिल्मों की पटकथा लिखते हुए उन्होंने सात फिल्मों का निर्देशन किया और पटकथा के लिए चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी जीते। उनकी पटकथाएं एक किताब के रूप में उपलब्ध हैं। नायर को केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार, वायलर पुरस्कार, वल्लथोल पुरस्कार, एजुथाचन पुरस्कार, मातृभूमि साहित्य पुरस्कार और ओएनवी साहित्य पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। उन्होंने कई वर्षों तक मातृभूमि इलस्ट्रेटेड वीकली के संपादक के रूप में भी काम किया। 2013 में उन्हें मलयालम सिनेमा में आजीवन उपलब्धि के लिए जे.सी. डेनियल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 2022 में उन्हें केरल सरकार के सर्वोच्च नागरिक सम्मान केरल ज्योति पुरस्कार मिला। नायर को साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए 1995 में सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ज्ञानपीठ से सम्मानित किया गया था। उन्होंने कई वर्षों तक मातृभूमि इलस्ट्रेटेड वीकली के संपादक के रूप में भी काम किया।
मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने जताई संवेदना
मुख्यमंत्री पिनरई विजयन के कार्यालय ने नायर के निधन की पुष्टि की। मुख्यमंत्री ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा, 'एम.टी.वासुदेवन के निधन से हम मलयालम साहित्य की एक महान हस्ती को खो बैठे हैं, जिन्होंने हमारी भाषा को वैश्विक स्तर तक पहुंचाया। वह हमारे एक सच्चे सांस्कृतिक प्रतीक थे, जिन्होंने अपनी अमर रचनाओं के जरिए केरल की आत्मा को जीवित किया। उनकी धर्मनिरपेक्षता और मानवता के प्रति प्रतिबद्धता एक ऐसी धरोहर छोड़ गई है, जो आने वाली पीड़ियों प्रेरित करेगी। उनके परिवार और सांस्कृतिक समुदाय के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं।'
भारतीय साहित्य के लिए बड़ा आघात
राज्यपाल खान ने ट्वीट कर लिखा कि एमटी का जाना मलयालम और भारतीय साहित्य के लिए बड़ा आघात है। बतौर साहित्यकार उन्होंने दुर्लभ श्रेष्ठता हासिल की। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने भी उनके निधन पर दुख जताया।
दो दिन का राजकीय शोक
केरल सरकार ने नायर के निधन पर 26 व 27 दिसंबर को राजकीय शोक घोषित किया है। मुख्यमंत्री ने सभी तय सरकारी कार्यक्रम टाल दिए हैं।