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नोटबंदी: जानिए कहां चूक कर बैठी सरकार, एटीएम ने क्यों दिया धोखा

Mon, 14 Nov 2016 07:32 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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नोट बैन को लेकर देशभर में मची अफरातफरी और बैंकों के बाहर लगी लंबी लाइनें हर तरफ सुर्खियों में हैं। नोट बदलवाने की जद्दोजहद में लोग अपना कामधाम छोड़ने को मजबूर हैं। इसके कारण कहीं कहीं लोगों का आक्रोश भी फूट रहा है। 
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ऐसे में हर तरफ सरकार के इस फैसले पर सवाल भी उठने शुरू हो गए हैं। लोगों के आक्रोश का अंदाजा सरकार को भी है यही कारण है कि दो दिन में दो बार प्रधानमंत्री मोदी खुद इस मुद्दे पर आम जनता के बीच अपनी बात रख चुके हैं तो इस मामले से नजदीकी से जुड़े रहे आर्थिक मामलों के सचिव शशिकांत दास ने प्रेस कान्फ्रेंस कर सरकार द्वारा जनता की राहत के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। 

हालांकि सवाल अब भी नोट बैन पर सरकार की उस चूक पर उठ रहे हैं जिसकी वजह से जनता को इतनी परेशानी झेलनी पड़ रही है। ज्यादा दिक्‍कत तो खाली पड़े एटीएम की वजह से है जिसके चलते लोगों को नकदी के लिए जूझना पड़ रहा है। 
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जानकारों की मानें तो सरकार एटीएम की तकनीकी समस्‍या को पढ़ने में चूक कर बैठी नतीजतन खाली एटीएम के बाहर लोग लाइन खड़े हैं। आइए आपको रूबरू कराते हैं एटीएम की उन तकनीकी समस्याओं से जिसकी वजह से आम आदमी को परेशान होना पड़ रहा है। 

एटीएम में बिना तकनीकी बदलाव के बड़े नोट रखना संभव नहीं

- फोटो : reuters
कई दिन के बाद चालू हुए एटीएम में सबसे ज्यादा समस्या तो नोट खत्म होने की आ रही है। एटीएम में नोट डलते ही वह तुरंत खत्म हो जा रहे हैं। उसकी बड़ी दिक्‍कत ये है कि एटीएम में अभी तक 100 के नोट ही डाले जा रहे हैं जो लोगों की जरूरत के हिसाब से काफी कम पड़ रहे हैं। 

असल में ऐसा तकनीकी समस्या की वजह से हो रहा है। ज्यादातर एटीएम में तीन दराज होती हैं जिन्हें कैसेट भी कहा जाता है, जिसमें 1000, 500 और 100 के नोट डाले जाते हैं। पूर्व में व्यक्ति अपनी इच्‍छानुसार एटीएम से पैसे निकाल सकता था। 

हर दराज में नोटों की 22 गड्डियां रखी जा सकती हैं, एक गड्डी में 100 नोट होते हैं यानि एक दराज में 22 सौ नोट और कुल तीन दराज में 66 सौ नोट रखे जा सकते हैं। यानि लगभग 6.6 लाख रुपये तक। जबकि पूर्व में 500 और 1000 के नोट रखे जाने की वजह से यह लिमिट 4‌0 लाख तक भी पहुंच जाती थी। 

वर्तमान हालात में एटीएम में 500 और 1000 की बजाय केवल 100 के नोट ही रखे जा रहे हैं। अब दिक्‍कत ये है कि अगर एक व्यक्ति अधिकतम 2 हजार रुपये यानि 20 नोट निकालता है (जो फिलहाल की परि‌स्थितियों में हर व्यक्ति निकाल रहा है) तो मात्र 330 लोगों की जरूरतें एक एटीएम से पूरी हो सकती हैं। 

जबकि पूर्व में यह संख्या दो से ढाई हजार तक पहुंचती थी। एक दिक्‍कत ये भी है कि एटीएम की तकनीकी फीडिंग की वजह से 500 और 2000 के  नए नोट उसमें रखना संभव नहीं है। क्योंकि नया नोट थोड़ा छोटा होने के कारण एटीएम उसे रीड नहीं करता है ऐसे में बिना तकनीकी बदलाव किए उसमें नई गड्डियां रखना संभव नहीं है।
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वित्त मंत्री ने भी माना एटीएम की समस्‍या दूर करने में लगेगा समय

- फोटो : amar ujala
बैंक अधिकारियों की मानें तो इस समस्या को दूर करने में अभी हफ्तेभर का समय लग जाएगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी कल इस बात के संकेत दिए थे कि एटीएम की समस्या को पूरी तरह दूर करने में दो से तीन हफ्ते का समय लग सकता है। 

हालांकि आज आर्थिक मामलों की सचिव शशिकांत दाव ने दावा किया है कि अगले दो दिनों में काफी एटीएम में दो हजार के नोट डाल दिए जाएंगे।  आईसीआईसी बैंक की सीईओ चंदा कोचर ने भी दावा किया है कि बैंक के एटीएम से जल्द ही दो हजार और 500 के नए नोट निकलने शुरू हो जाएंगे जिसके बाद हालात तेजी से सुधरेंगे।

बहरहाल एटीएम की समस्या बेशक जब दूर हो लेकिन इतना तो तय है कि सरकार अगर एटीएम में नई करेंसी रखवाने की व्यवस्‍था को पहले से ही दुरुस्त कर लेती तो हालात इतने न बिगड़ते। बैंक अधिकारी भी इस समस्या को लेकर नाराजगी जाहिर करते हैं, उनका कहना है कि सरकार ने अगर शुरू में ही इस समस्या पर ध्यान दे दिया होता तो न हालात इतने बिगड़ते न उन पर इतना लोड बढ़ता।
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