इधर नोटबंदी का एलान हुआ और उधर लाल और नीली बत्ती लगी गाड़ियां दौड़ पड़ीं। अब नीली बत्ती का मतलब तो किसी बड़े अधिकारी से है और लाल बत्ती का मंत्री से। लिहाजा टोल कर्मी भी चौकन्ने हो गए थे। 9 नवंबर को ही लाल और नीली बत्ती लगी 396 गाड़ियां यमुना एक्सप्रेसवे से गुजरीं। कोई लखनऊ की साइड जा रही थी और कोई दिल्ली।
अब अचानक इन अफसरों की दौड़ क्यों शुरू हुई यह तो वही जानें लेकिन दाल में कुछ न कुछ काला जरूर रहा होगा। टोल प्लाजा से गुजरने वाली नीली बत्ती वाली गाड़ियों के आंकड़ों पर अगर गौर किया जाए तो 9 नवंबर से लेकर 24 नवंबर तक लाल और नीली बत्ती लगी करीब 2,800 गाड़ियां यमुना एक्सप्रेसवे से गुजरी हैं।
8 नवंबर की शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1000 और 500 के नोट बंद होने का एलान किया था। काला धन और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए यह कदम उठाया गया। पूरे देश में एक सनसनी सी थी। भागदौड़ भी बढ़ गई थी।
नोएडा से आगरा तक 188 किलोमीटर के यमुना एक्सप्रेसवे पर तो 9 नवंबर की सुबह से रात तक नीली बत्ती वाली गाड़ियों की संख्या अचानक बढ़ गई। 396 गाड़ियां इस दिन गुजरीं। कुछ आगरा की साइड चलीं गईं तो कुछ दिल्ली वाली साइड। क्योंकि लाल और नीली बत्ती लगी गाड़ी को टोल पर नहीं रोका जाता है लिहाजा धड़ाधड़ दौड़ती रहीं।