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नोटबंदी: इधर एलान हुआ और उधर दौड़ पड़ीं मंत्री-अफसरों की गाड़ियां

Fri, 25 Nov 2016 04:58 AM IST
पुनीत शर्मा/ कुशल, मथुरा 
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लाल बत्ती
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इधर नोटबंदी का एलान हुआ और उधर लाल और नीली बत्ती लगी गाड़ियां दौड़ पड़ीं। अब नीली बत्ती का मतलब तो किसी बड़े अधिकारी से है और लाल बत्ती का मंत्री से। लिहाजा टोल कर्मी भी चौकन्ने हो गए थे। 9 नवंबर को ही लाल और नीली बत्ती लगी 396 गाड़ियां यमुना एक्सप्रेसवे से गुजरीं। कोई लखनऊ की साइड जा रही थी और कोई दिल्ली।
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अब अचानक इन अफसरों की दौड़ क्यों शुरू हुई यह तो वही जानें लेकिन दाल में कुछ न कुछ काला जरूर रहा होगा। टोल प्लाजा से गुजरने वाली नीली बत्ती वाली गाड़ियों के आंकड़ों पर अगर गौर किया जाए तो 9 नवंबर से लेकर 24 नवंबर तक लाल और नीली बत्ती लगी करीब 2,800 गाड़ियां यमुना एक्सप्रेसवे से गुजरी हैं।

8 नवंबर की शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1000 और 500 के नोट बंद होने का एलान किया था। काला धन और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए यह कदम उठाया गया। पूरे देश में एक सनसनी सी थी। भागदौड़ भी बढ़ गई थी।
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नोएडा से आगरा तक 188 किलोमीटर के यमुना एक्सप्रेसवे पर तो 9 नवंबर की सुबह से रात तक नीली बत्ती वाली गाड़ियों की संख्या अचानक बढ़ गई। 396 गाड़ियां इस दिन गुजरीं। कुछ आगरा की साइड चलीं गईं तो कुछ दिल्ली वाली साइड। क्योंकि लाल और नीली बत्ती लगी गाड़ी को टोल पर नहीं रोका जाता है लिहाजा धड़ाधड़ दौड़ती रहीं।
 
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पैसा ठिकाने लगाने में भी हुआ बत्तियों का इस्तेमाल

लाल बत्ती
अब नीली बत्ती का इस्तेमाल तो अफसर ही करते हैं लिहाजा सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि कहां जा रहे थे यह अधिकारी। इतनी जल्दी में क्यों थे। टोल प्लाजा प्रशासन के अनुमान के मुताबिक 9 नवंबर से 24 नवंबर तक 2,800 गाड़ियां बत्ती लगी गुजर चुकी हैं।

इनमें नीली बत्ती वाली ज्यादा हैं। पहले इन वाहनों की संख्या इतनी नहीं थी। दिनभर में मुश्किल से 60 से 80 गाड़ियां निकलती थीं लेकिन अब 200 तक वाहन आ रहे हैं। एक्सप्रेसवे कोरिडोर के इंचार्ज मेजर मनीष ने बताया कि इस समय गाड़ियों की संख्या में तेजी के साथ इजाफा हो रहा है।     

पैसा ठिकाने लगाने में भी हुआ बत्तियों का इस्तेमाल
नोटबंदी के साथ ही काले धन पर अंकुश लगाने को मुहिम शुरू हुई थी। लोग बाग अपना पैसा ठिकाने लगाने के लिए भी बत्तियों का प्रयोग कर रहे थे। कहीं पुलिस की चेकिंग में न फंस जाएं इसके लिए भी लाल और नीली बत्तियों का प्रयोग किया गया। पुलिस की चेकिंग में भी ऐसी गाड़ियां पकड़ी जा चुकी हैं जिन पर नीली और लाल बत्ती लगी थी। पता चला कि कोई गाड़ी किसी अधिकारी के परिवार की थी तो कोई रिश्तेदार की।
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