सार्वजनिक इमारतों को दिव्यांगों के अनुकूल बनाने को लेकर केंद्र सरकार की उदासीनता पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। शीर्ष अदालत ने यहां तक कहा कि यह भारत सरकार है या कोई पंचायत। चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी पाया कि इस मसले को लेकर केंद्रीय समन्वयन समिति की दो वर्षों से बैठक नहीं हुई। इससे नाराज पीठ ने सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने यह जानना चाहा कि आखिर उस मंत्री का क्या नाम है जिन्होंने दो वर्षों से बैठक तक नहीं की।
पीठ ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि यह अलग बात है कि पूर्व सरकार ने कुछ नहीं किया लेकिन अब तक दूसरी सरकार है। पीठ ने कहा कि आखिर इस सरकार ने क्या किया। क्यों नहीं दो वर्षों से एक बैठक आयोजित की गई। पीठ ने कहा कि कौन सम्मानीय मंत्री हैं जो फाइल पर बैठे हैं।
यह केंद्र सरकार का काम है कि वह तमाम स्टेक होल्डर के साथ बैठक करें और सार्वजनिक इमारतों को दिव्यांगो के अनुकूल बनाने केलिए निर्देश दें। जिसके बाद सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि उनका नाम थावर चंद गहलोत है। उन्होंने बताया कि समिति की अंतिम बैठक पिछली सरकार केसमय वर्ष 2012 में हुई थी। उन्होंने बताया कि चूंकि मौजूदा सरकार राइट्स ऑफ दी पर्सन विथ डिस्एबिलिटी बिल, 2014 लेकर आई है इसलिए बैठक नहीं आयोजित हो सकी।