जब देश में कोई बड़ा निर्णय अथवा ज्यादातर आबादी को प्रभावित करने वाला फैसला होता है तो उसका लोगों के मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव पड़ता है। भारत सरकार की ओर से नोटबंदी का फैसला भी बड़ा है और सभी लोगों से जुड़ा है। संभव है कि इससे मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित हुआ हो। पहले भी इस तरह के निर्णय के बाद ऐसी स्थिति वैश्विक स्तर पर देखी जा चुकी है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ एसके खंडेवाल ने बताया कि देश में नोटबंदी के फैसले के बाद मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पैसे के लिए लाइन में खड़े लोगों की मौत अथवा पैसे न मिलने की वजह से आत्महत्या का भी मामला प्रकाश में आया है। यही नहीं, इस फैसले की वजह से संभव है कि लोग अवसाद के शिकार हों, क्योंकि जब भी कोई बड़ा फैसला लिया जाता है तो इसका प्रभाव मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। 30 नवंबर से चार दिसंबर तक दिल्ली में आयोजित होने वाली वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ सोशल साइकेट्री के 22वें वर्ल्ड कांग्रेस में नोटबंदी के बाद मानसिक स्वास्थ्य पर पडने वाले प्रभाव पर चर्चा होगी।
डॉ. खंडेवाल ने कहा कि हाल ही में अमेरिका में सभी कयासों और सर्वे को धता बताते हुए डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति के लिए निवार्चित हुए, इस निर्णय के बाद अमेरिका में भी ऐसी स्थिति देखी गई है। यही नहीं मंडल कमीशन के बाद भारत में कई लोगों ने आत्महत्या की थी, उस दौरान भी स्थिति बहुत खराब हुई थी। डॉ. खंडेवाल ने बताया कि कहा कि मानसिक स्वास्थ्य पर पडने वाले प्रभाव का असर कुछ समय बाद दिखेगा।