हिंदी, भोजपुरी साहित्य के पुरोधा डा. विवेकी राय का मंगलवार को निधन हो गया। वह 93 वर्ष के थे। उन्होंने महमूरगंज के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। ब्रेन हैमरेज के बाद उन्हें दो नवंबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके निधन की जानकारी मिलने के बाद साहित्य जगत में शोक छा गया। उनका अंतिम संस्कार मणिकर्णिका घाट पर हुआ। छोटे पुत्र दिनेश राय ने मुखाग्नि दी।
विवेकी राय के निधन की जानकारी मिलने के बाद केंद्रीय रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा उनके आवास पहुंचे और श्रद्धांजलि दी। 2006 में यूपी सरकार ने उन्हें यश भारती से सम्मानित किया था। राष्ट्रपति पुरस्कार, साहित्य भूषण समेत दर्जन भर सम्मानों से उन्हें नवाजा जा चुका था।
उनके दो पुत्रों में से एक ज्ञानेश्वर राय की 1997 में एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। दूसरे पुत्र दिनेश के अलावा उनकी तीन पुत्रियां सावित्री, जामवंती और संतोषी हैं। कथाकार डॉ. काशीनाथ सिंह, कवि ज्ञानेंद्र पति, वाचस्पति उपाध्याय, प्रो. अवधेश प्रधान, प्रो. चंद्रकला त्रिपाठी, प्रो. बलिराज पांडेय समेत कई साहित्यकारों ने उनके निधन पर शोक जताया है।
अर्गला, रजनीगंधा, यह जो है गायत्री समेत छह काव्य संग्रह के अलावा कहानी संग्राह जीवन परिधि, नई कोयल, गूंगा जहाज, बेटे की बिक्री उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में शामिल हैं। बबूल, पुरुष पुराण, लोक ऋण, श्वेतपत्र, सोनामाटी, मंगल भवन, नमामि ग्रामम्, अमंगलहारी जैसे उपन्यासों से उन्होंने ख्याति अर्जित की।