नोटा को मतदाता के लिए एक विकल्प माना गया था, जो किसी भी प्रत्याशी को पसंद न करने पर इसका उपयोग कर सकते थे। 2014 के आम चुनाव में ओडिशा के नबरंगपुर में बीजद के बालभद्र माझी 373887 वोट पाकर जीते थे, तो कांग्रेस के प्रदीप कुमार माझी को 371845 वोट मिले थे। हार जीत का अंतर 2042 वोटों का ही था। यहां 44408 वोट नोटा में पड़े। 2013 में ऐसी नौ प्रतिशत सीटें थीं, जहां नोटा के वोट हार जीत के मार्जिन से अधिक थे। लेकिन फिर यह मार्जिन घटता गया। 2015 में 6.71 प्रतिशत, 2016 में 7.65 प्रतिशत, 2017 में यह 6.38 प्रतिशत और 2018 में 6.56 प्रतिशत ही रहा।