दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने कहा है कि राजधानी के लोगों को सीलिंग से बचाने के लिए मनोज तिवारी को सीलिंग तोड़ने की बजाय केंद्र सरकार का ताला तोड़ना चाहिए क्योंकि लोगों को सीलिंग से बचाने की चाबी उसी ताले में कैद है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के पास मास्टर प्लान में संशोधन करने की ताकत भी है और इस मसले पर अध्यादेश लाने की भी। लेकिन अगर सरकार चाहे तो वह बिना यह सब किये भी दिल्ली के लोगों को सीलिंग से बचा सकती है। माकन के मुताबिक उनकी सरकार ने दिल्ली के मास्टर प्लान में गैर प्रदूषणकारी उद्योगों को घरेलू उद्योग के रूप में चलाने की इजाजत दे रखी है।
यूपीए सरकार ने कुल 121 उद्योगों को गैर प्रदूषणकारी उद्योगों में शामिल किया था। इन्हें किसी रिहाइशी इलाके में भी बिना किसी रोकटोक के चलाया जा सकता था। सिर्फ इसी आधार पर लाखों लोगों को सीलिंग से राहत दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार भी इस मसले पर ईमानदारी नहीं निभा रही है।
अगर वह चाहती तो सिर्फ घरेलू उद्योगों की परिभाषा में परिवर्तन कर लोगों को सीलिंग से बचा सकती थी। लेकिन वह ऐसा नहीं कर रही है जिसकी वजह से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
अजय माकन ने कहा कि सीलिंग पर लोगों को राहत देने की बजाय उन्हें लेबर इंस्पेक्टर, उद्योग और प्रदूषण विभाग से भी अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुटीर उद्योग चलाने वाले लोगों को अनावश्यक तीन-तीन इंस्पेक्टर से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने का दबाव बनाया जा रहा है जबकि वे इतना तकनीकी विषय समझने के काबिल भी नहीं होते।
इस तरह उन्हे सीलिंग से बचने का रास्ता नहीं दिया जा रहा है बल्कि उन्हे और अधिक उलझाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर दोनों सरकारों ने लोगों को इस परेशानी का हल नहीं सुझाया तो उन्हे इसके खिलाफ सड़कों पर उतरना पड़ेगा।