इसकी गहन जांच की जा रही है कि ये बच्चे कहां हैं। यह खेल लंबे समय से चल रहा है। इस काले धंधे से जुड़े लोगों की पहुंच इतनी है कि बच्चों की खरीद-बिक्री के खेल पर हाथ डालने वाले सीडब्ल्यूसी के तत्कालीन अध्यक्ष ओमप्रकाश सिंह और सदस्य मु. अफजल को इन्होंने बर्खास्त करा दिया था। इन दोनों अधिकारियों पर छेड़छाड़ का आरोप मढ़कर सुनियोजित साजिश रचकर हटवा दिया गया था। मामला 2015 का है। अध्यक्ष और सदस्य डोरंडा स्थित शिशु भवन का निरीक्षण करने गए थे। इस दौरान उन्हें वहां घुसने से रोका गया था। जबरन जांच की बात कह घुसे तो छेड़छाड़ का आरोप लगाकर बर्खास्त करा दिया गया।
मिशनरीज ऑफ चैरिटी की ओर से संचालित ‘निर्मल हृदय’ आश्रम से नाबालिग अविवाहित मां के दो माह के बच्चे को बेच दिया गया था। आश्रम की स्टाफ और सिस्टर की मिलीभगत से इस घटना को अंजाम दिया गया। मामले में रांची बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। इसे लेकर निर्मल हृदय में काम करने वाली स्टाफ अनिमा इंदवार और सिस्टर कांसिलिया को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।
हाल ही गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से उन घटनाओं का पता लगाने को कहा था जिनमें सोशल मीडिया पर बच्चा उठाने की अफवाहों के बाद भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या की घटना को अंजाम दिया। बीते दो महीने में बच्चा चोरी के संदेह में 20 से ज्यादा लोगों की पीट-पीटकर हत्या की जा चुकी है। हाल की घटना एक जुलाई को महाराष्ट्र के धुले में हुई जिसमें बच्चा चोर होने के शक में पांच लोगों की हत्या कर दी गई।
मानव तस्करी के 8000 मामले
गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार साल 2016 में देश में मानव तस्करी के 8132 मामले दर्ज किए गए। बच्चों के खिलाफ अपराध के 1.06 लाख मामले भी दर्ज किए गए। ये साल 2015 की तुलना में 13.6 फीसदी अधिक थे।