बिहार मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गईं हैं। इस मामले में 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और याचिकाकर्ताओं से जवाब मांगा था। मामले में एडीआर ने जवाब दाखिल कर दिया है।
बिहार मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर गैर सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया है। एडीआर ने कहा कि बिहार की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में दस्तावेजों की सूची से आधार और राशन कार्ड को बाहर रखना पूरी तरह से बेतुका है। चुनाव आयोग ने अपने इस फैसले के लिए कोई वैध कारण नहीं बताया है।
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एडीआर ने कहा कि आधार कार्ड स्थायी निवास प्रमाण पत्र, ओबीसी/एससी/एसटी प्रमाण पत्र और पासपोर्ट प्राप्त करने के लिए स्वीकार किए जाने वाले दस्तावेजों में से एक है। इसके चलते तत्काल एसआईआर आदेश के तहत चुनाव आयोग द्वारा आधार को अस्वीकार करना स्पष्ट रूप से बेतुका हो जाता है। चुनाव आयोग ने आधार और राशन कार्ड को स्वीकार्य दस्तावेजों की सूची से बाहर करने का कोई वैध कारण नहीं बताया है।
संगठन ने तर्क दिया है कि निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों को व्यापक और अनियंत्रित विवेकाधिकार दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप बिहार की आबादी का एक बड़ा हिस्सा मताधिकार से वंचित हो सकता है। एनजीओ ने कहा कि याचिका में कहा गया है कि 24 जून 2025 के एसआईआर आदेश को यदि रद्द नहीं किया गया तो मनमाने ढंग से और बिना उचित प्रक्रिया के लाखों नागरिकों को अपने प्रतिनिधियों को चुनने के अधिकार से वंचित किया जा सकता है। इससे देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव और लोकतंत्र बाधित हो सकता है, जो संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा हैं।
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इससे पहले चुनाव आयोग ने बिहार में मतदाता सूचियों की चल रही एसआईआर को उचित ठहराते हुए कहा था कि इससे मतदाता सूचियों से अयोग्य व्यक्तियों को बाहर करके चुनाव की शुद्धता बढ़ती है। बिहार में एसआईआर के खिलाफ कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने 10 जुलाई को चुनाव आयोग से कहा था कि वह बिहार में मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान आधार, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड को वैध दस्तावेज माने।