वार्षिक लेखा-जोखा न देने वाले गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) को सिर्फ काली सूची में डालने को अपर्याप्त बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को ऐसे एनजीओ केखिलाफ दीवानी और आपराधिक कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया है। साथ ही शीर्ष अदालत ने सरकार को देशभर केकरीब 32 लाख गैर सरकारी संगठनों(एनजीओ) के खातों की ऑडिट करने का निर्देश दिया है। सरकार को अदालत में ऑडिट रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है।
चीफ जस्टिस जेएस खेहड़ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा पब्लिक फंड की अनियमितता में शामिल होने और वार्षिक लेखा-जोखा न देने वाले एनजीओ को सिर्फ काली सूची में डालना पर्याप्त नहीं है। पीठ ने सरकार को ऐसे एनजीओ के खिलाफ फंड की अनियमितता और रकम की वसूली की कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
पीठ ने कहा कि एनजीओ को मिलने वाला फंड वास्तव में आम लोगों का पैसा होता है, लिहाजा इसके दुरूपयोग की इजाजत कतई नहीं दी जा सकती। पीठ ने कहा कि एनजीओ को अपना वार्षिक लेखा-जोखा देना जरूरी है।