असम में कांग्रेस-भाजपा की जीत-हार के धूरी बन चुके हेमंत विश्व शर्मा से अमर उजाला के एम संजय ने चौपर में विशेष चर्चा की। पेश है प्रमुख अंश
मुख्यमंत्री तरूण गोगोई के आप बेहद विश्वास पात्र माने जाते थे। लेकिन इस दफे उनकी नैया डूबाने में जुटे हैं। सोच में अचानक यह बदलाव क्यों, कांग्रेस से लड़ाई की वजह क्या है?
देखिए, हमारी लड़ाई कांग्रेस से नहीं सीधे राहुल गांधी से है। राहुल गांधी कांग्रेस को बचाने नहीं डूबाने आए हैं। उनमें राजनीतिक समझ नहीं। उनसे ज्यादा एक सामान्य कॉलेज विधार्थी में राजनीतिक समझ होती है। असम में हार कांग्रेस की नहीं बल्कि राहुल गांधी की होगी। तरुण गोगोई से मेरा विवाद नहीं है। सूबे में हमने कांग्रेस को बदरूद्दीन अजमल के खिलाफ एक सशक्त दल के रूप में उभारा लेकिन राहुल के दबाव के कारण मुख्यमंत्री तरुण गोगोई अजमल से सांठगांठ किए हुए हैं, जोकि लड़ाई की वजह है।
आपके जरिए कांग्रेस पार्टी में शुरू की गई बगावत असम के बाद अरूणाचल और उत्तराखंड पहुंच गई है, आखिर वजह क्या है?
जब तक राहुल गांधी हैं, कांग्रेस में बगावत चलती रहेगी। राहुल गांधी कांग्रेस को बचाने नहीं डूबाने आए हैं। उनमें राजनीतिक समझ नहीं। उनसे ज्यादा एक सामान्य कॉलेज विधार्थी में राजनीतिक समझ होती है।
आप कब तक खेवनहार की भूमिका में रहेंगे। पिछले दफे गोगोई के सिर मुख्यमंत्री का ताज बंधवाया तो अबके सोनवाल के सिर सेहरा बांध रहे है। खुद क्यों नहीं बनते?
पार्टी के जीत से खुश हुं, मुख्यमंत्री की चाहत नहीं। सर्वानंद को मुख्यमंत्री बनते देखना चाहता हुं। मैं अभी भाजपा का विश्वास जीतना चाहता हुं। कार्यकर्ता से
लेकर नेताओं के दिल में उतरना चाहता हुं।
चर्चा है कि सोनवाल महज चुनाव तक चेहरा हैं। मुख्यमंत्री का असल खेल परिणाम के बाद होगा। अगप और बोड़ो आपको मुख्यमंत्री बनाने की मांग करेंगे?
मुख्यमंत्री को लेकर चुनाव से पहले और बाद में कोई खेल नहीं होगा। भाजपा को अकेले बहुमत मिला तो भी और नहीं मिला तब भी सर्वानंद ही मुख्यमंत्री
बनेंगे। मैं पूरी तरह से उनका साथ दुंगा।
सरकार में आपका रोल क्या रहेगा?
मेरा रोल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह तय करेंगे। उन्होंने मुझ पर विश्वास किया है, उनके विश्वास पर आंच नहीं आने दुंगा। अभी भाजपा के जीत में ही मेरी खुशी है।
सरकार बनने के बाद असम में आपकी प्राथमिकता क्या रहेगी?
प्रदेश की अस्मिता एवं संस्कृति बचाना अहम कार्य होगा। विकास में सबकी भागीदारी होगी। हिंदू - मुस्लिम सबके लिए समान कार्य होंगे। बांगलादेशियों से कब्जे की जमीन मुक्त कराएंगे।
भाजपा का चार दलों के साथ गठबंधन है कैसे चलेगा गठबंधन दलों के हित आपस में भारी तो नहीं पडेंगें?
एक साक्षा संस्थागत मेकानिज्म बनाया है। सबके हितों का ख्याल रखा जाएगा। सरकार चलाने में कोई बाधा नहीं होगी। टिकट बंटवारें में भी सबका ख्याल रखा है।