केरल के राज्य स्तरीय स्कूलों में अगले साल से आर्ट फेस्टिवल में मांसाहारी और शाकाहारी दोनों प्रकार के व्यंजन परोसे जाएंगे। सामान्य शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने कहा, अगले साल दोनों तरह के व्यंजनों को मेन्यू में शामिल किया जाएगा। इसके लिए फेस्टिवल मैनुअल में जरूरत पड़ने पर बदलाव किए जाएंगे।
शिवनकुट्टी की टिप्पणी तब आई है, जब हाल ही में स्कूली छात्रों के लिए भोजन की पसंद के मुद्दे पर सोशल मीडिया पर जमकर हंगामा हुआ। शिवनकुट्टी ने सोशल मीडिया में लग रहे सभी आरोपों को खारिज कर दिया था और कहा था कि बहस पूरी तरह से गैर-जरूरी थी।
मंत्री ने कहा, राज्य में पिछले साठ वर्षों से युवा महोत्सव के लिए एक ही तरह का शाकाहारी भोजन परोसा जा रहा है और कोई विवाद नहीं है। दशकों से भाग लेने वाले बच्चों, उनके शिक्षकों और माता-पिता के बीच वार्षिक पर्व के भोजन मंडपों में स्वादिष्ट शाकाहारी व्यंजन परोसे जाते हैं। वार्षिक पर्व बच्चों की भारी भागीदारी केलिए जाना जाता है।
शिवनकुट्टी ने गुरुवार को समारोह स्थल पर पत्रकारों से मुलाकात के दौरान कहा था कि हजारों लोगों ने फेस्टिवल में परोसे जा रहे भोजन का लुत्फ उठाया। उन्होंने कहा, फेस्टिवल के पहले दिन करीब तीस हजार लोगों को भोजन परोसा गया, जबकि दूसरे दिन करीब चालीस हजार लोगों ने भोजन का लुत्फ उठाया। यह एक फेस्टिवल है। जो भी काउंटर पर पहुंचेगा, सरकार उसे भोजन देगी।
शिवनकुट्टी ने कहा, राज्य सरकार इस बात पर अड़ी नहीं है कि मांस को स्टेट यूथ फेस्टिवल से बाहर रखा जाए। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में लोगों को परोसने के लिए बड़ी मात्रा मांसाहारी व्यंजन तैयार करने में व्यावहारिक दिक्कतें हैं। यूथ फेस्टिवल के फूट पवेलियन में ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर के अलावा स्नैक्स और चाय के साथ मिठाइयां भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
मेन्यू में मांसाहारी व्यंजनों को शामिल न करने पर विवाद तब शुरू हुआ जब कुछ लोगों ने फेस्टिवल के दौरान केवल शाकाहारी आइटम परोसने के वर्षों के चलन पर सवाल उठाया, जिससे सोशल मीडिया पर यूजर्स के बीच अपने-अपने विचारों की गरमागरम बहस हुई।