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टूलकिट मामले में निकिता जैकब और शांतनु पर लगे ये गंभीर आरोप, गैर जमानती वारंट जारी

Tue, 16 Feb 2021 07:37 AM IST
Amit Mandal एजेंसी, नई दिल्ली
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Toolkit case - फोटो : अमर उजाला
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किसानों के प्रदर्शन से जुड़ी टूलकिट साझा करने के आरोप में बॉम्बे हाईकोर्ट की वकील निकिता जैकब और शांतनु के खिलाफ दिल्ली की एक अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी किया है। इस टूलकिट को एडिट करने और इसे सोशल मीडिया पर साझा करने के आरोप में पहले ही पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस बीच निकिता ने बॉम्बे हाईकोर्ट में ट्रांजिट जमानत याचिका दायर की है। 

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एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि निकिता और शांतनु पर दस्तावेज तैयार करने और खालिस्तान समर्थक तत्वों के सीधे संपर्क में होने का आरोप है। दोनों टूलकिट मामले में वांछित हैं। दोनों की तलाश में पुलिस ने मुंबई और अन्य जगहों पर छापा भी मारा। वहीं दूसरी ओर गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद निकिता ने बॉम्बे हाईकोर्ट से ट्रांजिट जमानत याचिका दायर की। उन्होंने इसमें कहा कि दिल्ली पुलिस की साइबर सेल तलाशी वारंट के साथ 11 फरवरी को उनके घर पहुंची और उनके इलेक्ट्रॉनिक गैजेट समेत कुछ दस्तावेज जब्त किए। साइबर सेल के साथ वनराई थाना गोरेगांव (ईस्ट) का एक सिपाही साथ आया था। सूत्रों की मानें तो साइबर सेल ने तब निकिता से कहा था कि वह फिर से आएगी, लेकिन दोबारा पहुंचने पर वह गायब थी। दिल्ली पुलिस का कहना है कि निकिता गिरफ्तारी से बचने के लिए छिप रही है।

उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि उसे सोशल मीडिया के जरिये पता चला कि शायद लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी नामक संस्था ने दिल्ली पुलिस से झूठे और आधारहीन शिकायत की है और 26 जनवरी को हुई हिंसा की जिम्मेदारी उन पर मढ़ रही है। उन्होंने हाईकोर्ट से अपील की कि दिल्ली साइबर पुलिस के निर्देश पर वनराई थाना या फिर मुंबई के किसी अन्य थाने की पुलिस द्वारा उसे गिरफ्तार किए जाने की आशंकाओं पर रोक लगाए। उसने मामले में दर्ज एफआईआर की एक प्रति सौंपे जाने की भी मांग की है।
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किस पर क्या आरोप 
दिशा रवि
- टूलकिट के लिए वॉट्सऐप ग्रुप बनाया 
निकिता जैकब -  शांतनु की बनाई टूलकिट को एडिट किया 
शांतनु - टूलकिट को दूसरों के साथ शेयर किया 

कौन है निकिता जैकब
विवाद होने पर निकिता ने अपना ट्विटर अकाउंट डिलीट कर दिया था। दावा किया जा रहा है कि तब उसने अपने प्रोफाइल में खुद का परिचय बॉम्बे हाईकोर्ट की वकील, पर्यावरणविद और आम आदमी पार्टी (आप) से जुड़े होना दिया था। हालांकि, नए प्रोफाइल में उन्होंने आम आदमी पार्टी से अपने संबंध की बात हटा दी है। ट्विटर यूजर विजय पटेल ने दावा किया है कि निकिता ने 30 जनवरी, 2021 को सॉलिडेरिटी विद इंडियन फार्मर्स नामक डॉक्यूमेंट तैयार किया था। दावा है कि उसने इंस्टाग्राम पर न्यूज इनफ्यूज नाम से एक अकाउंट भी बना रखा है।

निकिता ने अपने ट्विटर प्रोफाइल पर एक वेबसाइट का लिंक शेयर किया है। इस वेबसाइट पर उसने अपना परिचय में बताया है कि वह एक वकील है। साथ ही, सामाजिक न्याय और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद करती रहती है। वेबसाइट के मुताबिक, निकिता सही के पक्ष में खड़ा होना चाहती है लेकिन आखिर में वह अनचाहे गलती कर बैठती है। वह अपने बारे में कहती है कि उसे कोई भी आसानी से प्रभावित कर सकता है। निकिता अपने बारे में बताते हुए कहती है कि वो लेखक, गायिका और वॉइस आर्टिस्ट बनना चाहती है। फोटोग्राफी भी कर लेती है और खाना भी बना लेती है।

निकिता, शांतनु ने तैयार किया था ‘टूलकिट’ दिशा ने टेलीग्राम से ग्रेटा थनबर्ग को भेजा : दिल्ली पुलिस
पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि की गिरफ्तार पर बवाल के बीच दिल्ली पुलिस ने सोमवार को आरोप लगाया कि दिशा ने दो अन्य संदिग्धों निकिता जैकब और शांतनु के साथ किसानों के प्रदर्शन से जुड़ा ‘टूलकिट’ तैयार किया था और इसे सोशल मीडिया पर साझा किया। पुलिस का दावा है कि दिशा ने ही टेलीग्राम एप के जरिये ‘टूलकिट’ पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग को भेजा था। दिशा को पुलिस ने शनिवार रात को बंगलूरू से गिरफ्तार किया था।

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल के संयुक्त आयुक्त प्रेम नाथ ने दावा किया कि दिशा ने ‘टूलकिट’ के प्रसार के लिए तैयार एक व्हाट्सएप ग्रुप को डिलीट कर दिया है। उन्होंने कहा कि निकिता और शांतनु ने खालिस्तान समर्थक समूह पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन (पीजेएफ) द्वारा आयोजित जूम मीटिंग में भी शिरकत की थी। साथ ही निकिता भी ‘टूलकिट’ दस्तावेज एडिटरों में से एक थी। दिशा, शांतनु और निकिता ने टूलकिट तैयार किया और इसको एडिट किया। दिशा ने टेलीग्राम एप के जरिये टूलकिट ग्रेटा को भेजा। साथ ही दिशा ने एक व्हाट्सएप ग्रुप को भी डिलीट किया जिसे टूलकिट के प्रसार के लिए बनाया गया था। उन्होंने कहा कि दिशा की गिरफ्तारी के दौरान पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया। दिल्ली की एक अदालत ने रविवार को दिशा रवि को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था। 

खालिस्तान समर्थकों ने भारत की छवि खराब करने की रची साजिश
प्रेम नाथ ने कहा कि पिछले साल नवंबर-दिसंबर से चल रहे किसान आंदोलन के दौरान ही खालिस्तानी समर्थकों ने पूरी दुनिया में भारत की छवि खराब करने के लिए साजिश रचनी शुरू कर दी थी। टूलकिट उसी का हिस्सा था। इसके जरिये ग्लोबल डे ऑफ एक्शन, डिजिटल स्ट्राइक और ट्विटर स्टॉर्म लाने का षडयंत्र रचा गया। दिशा रवि ने 6 दिसंबर को एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था। इसमें कई लोगों को जोड़ा गया। 

धालीवाल ने जूम से इनके साथ बैठक की
खालिस्तानी संगठन से जुड़े पीजेएफ के एमओ धालीवाल ने कनाडा में रहने वाले अपने सहयोगी पुनीत के जरिये निकिता जैकब से संपर्क किया। 11 जनवरी को गूगल जूम के जरिये एक बैठक हुई, जिसमें दिशा, निकिता, शांतनु और धालीवाल समेत करीब 70 लोगों ने हिस्सा लिया। इसमें तय किया गया कि किसान आंदोलन के जरिये देश का माहौल खराब किया जाए। इसके बाद टूलकिट गूगल डॉक्यूमेंट तैयार कर किया गया। बाद में इसे सोशल मीडिया पर पोस्ट भी कर दिया गया। 26 जनवरी के बाद स्वीडन की पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने दिशा के कहने पर टूलकिट को साझा कर दिया।

आरोपियों ने सुबूतों को नष्ट किया
चार फरवरी को मामला जब संज्ञान में आया तो आरोपियों ने इसके सुबूत नष्ट करने शुरू कर दिए। दिशा ने व्हाट्सएप ग्रुप को डिलीट कर दिया लेकिन पुलिस ने धीरे-धीरे इनके खिलाफ सुबूत जुटा लिए। पुलिस ने मामले से जुड़े डिजिटल फुटप्रिंट जुटाए हैं। इसमें शांतनु का एक ई-मेल भी शामिल है, जिसमें टूलकिट का जिक्र किया गया है। तमाम जानकारियां जुटाने के बाद पुलिस ने पेशे से वकील निकिता के घर की तलाशी के लिए नौ फरवरी को तलाशी की अनुमति ली। 11 फरवरी को एक टीम मुंबई स्थित निकिता के घर पहुंची। वहां से पुलिस ने दो लैपटॉप और एक आईफोन बरामद किया। चूंकि टीम शाम को पहुंची थी, इसलिए निकिता से पूछताछ नहीं हुई। उससे पूछताछ में शामिल होने के लिए कुछ दस्तावेज पर हस्ताक्षर करवाए गए लेकिन अगले ही दिन निकिता फरार हो गई। शांतनु भी अपने घर से फरार है। पुलिस की कई टीमें इनकी तलाश में जुटी हैं।
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