स्पेशल कोर्ट एमपी/एमएलए ने कैबिनेट मंत्री डॉ. रीता बहुगुणा जोशी के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया है। आचार संहिता उल्लंघन और निषेधाज्ञा तोड़ने के मामले में डॉ. जोशी को कोर्ट में हाजिर होना था, मगर वह नहीं पहुंचीं। इसे गंभीरता से लेते हुए स्पेशल कोर्ट जज पवन कुमार तिवारी ने उनके विरुद्ध एनबीडब्ल्यू जारी करते हुए 31 अक्तूबर को उपस्थित होने का निर्देश दिया है। निषेधाज्ञा भंग कर मीटिंग करने के मामले में दर्ज मुकदमे की यह पत्रावली लखनऊ से स्थानांतरित होकर सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट आई है।
घटना 16 फरवरी 2010 की वजीरगंज थाने के शहीद स्मारक स्थल की है। एसओ ओमप्रकाश वर्मा ने कांग्रेस की तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी और महिला प्रकोष्ठ प्रभारी मीरा सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप है कि प्रशासन द्वारा निषेधाज्ञा का आदेश जारी किया गया था। इसका उल्लंघन कर शहीद स्मारक पर लाउडस्पीकर लगा कर भाषण दिया जा रहा था।
इस मामले को लखनऊ की अधीनस्थ न्यायालय ने 14 फरवरी 2011 को संज्ञान लिया था। कोर्ट ने मीरा सिंह और डॉ. रीता जोशी के उपस्थित न होने पर जमानती वारंट जारी किया था। 11 तारीखें बीत जाने के बाद भी कोई उपस्थित नहीं हुई। सोमवार को स्पेशल कोर्ट में प्रकरण की सुनवाई हुई। कोर्ट ने मीरा सिंह और रीता जोशी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया है।
एमपी/एमएलए कोर्ट में अन्य मामलों की भी सुनवाई
-आचार संहिता उल्लंघन के मामले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजबब्बर के खिलाफ आई पत्रावली पर सुनवाई की गई।
-मेरठ के पूर्व सांसद राजेंद्र अग्रवाल के खिलाफ ट्रेन रोकने के खिलाफ दर्ज मामले की सुनवाई की गई।
-आचार संहिता उल्लंघन के एक मामले में डॉ. रीता बहुगुणा जोशी द्वारा दाखिल क्रिमिनल रिवीजन की सुनवाई हुई।