फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जेम्स वॉटसन: डीएनए की गुत्थी सुलझाने वाले वैज्ञानिक का निधन, विज्ञान जगत में शोक; RGCB ने दी श्रद्धांजलि

Sat, 08 Nov 2025 09:52 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम।

सार

James Watson: नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक जेम्स वॉटसन का 97 की उम्र में केरल में अंतिम सांस ली। वॉटसन ने विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। इनमें सबसे महत्वपूर्ण डीएनए की डबल हेलिक्स संरचना की खोज है। उन्होंने 20वीं सदी के अंत में बायोटेक्नोलॉजी क्रांति की नींव रखी। 
विज्ञापन
जेम्स डी. वॉटसन - फोटो : एक्स/वेस्टलेक विश्वविद्यालय
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक जेम्स वॉटसन का 97 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। अमेरिका के कोल्ड स्प्रिंग हार्बर लेबोरेटरी (सीएसएचएल) के पूर्व अध्यक्ष रहे वॉटसन के निधन पर तिरुवनंतपुरम स्थित राजीव गांधी सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी (आरजीसीबी) के वैज्ञानिकों ने गहरा शोक व्यक्त किया।
विज्ञापन


20वीं सदी के अंत में बायोटेक्नोलॉजी क्रांति की नींव रखी
आरजीसीबी के निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) डॉ. टीआर संतोष कुमार ने अपने शोक संदेश में कहा कि जेम्स वॉटसन ने डीएनए की संरचना को समझकर विज्ञान में ऐतिहासिक खोज की, जिसने 20वीं सदी के अंत में बायोटेक्नोलॉजी क्रांति की नींव रखी। उन्होंने बताया कि वॉटसन जनवरी 1999 में आरजीसीबी आए थे और वहां शिक्षकों व छात्रों के साथ बातचीत की थी। उन्होंने डीएनए की संरचना के प्रभाव और जैविक सूचना के आदान-प्रदान के महत्व पर सार्वजनिक व्याख्यान भी दिया था।

ये भी पढ़ें: 'न्याय की भाषा वही हो, जो न्याय पाने वाले को समझ आए...', पीएम मोदी का 'ईज ऑफ जस्टिस' पर जोर
विज्ञापन
विज्ञापन


वॉटसन ने की थी डीएनए की डबल हेलिक्स संरचना की खोज
डीएनए की डबल हेलिक्स संरचना की खोज के सह-आविष्कारक जेम्स वॉटसन ने 1953 में विज्ञान की दुनिया में क्रांति ला दी थी। उनकी इस खोज ने न सिर्फ चिकित्सा, बल्कि अपराध जांच, वंशावली और नैतिक विज्ञान जैसे क्षेत्रों में भी नई राह खोली।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें