अभिजीत बनर्जी
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1983 में जवाहर लाल यूनिवर्सिटी (जेएनयू) से एमए करने के बाद 1988 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी की है। अभिजीत ने फरवरी 2016 में लिखे एक लेख में बताया था कि उन्हें तिहाड़ जेल में रहना पड़ा था। उन्होंने कहा, 1983 की गर्मियों में हम जेएनयू के छात्रों ने वाइस चांसलर का घेराव किया था। वह हमारे छात्रसंघ अध्यक्ष को कैंपस से निष्कासित करना चाहते थे। घेराव-प्रदर्शन के दौरान देश में कांग्रेस सरकार थी। पुलिस सैकड़ों छात्रों को उठाकर ले गई। हमें दस दिन तिहाड़ में रहना पड़ा, पिटाई भी हुई, लेकिन तब राजद्रोह जैसा मुकदमा नहीं होता था। हत्या की कोशिश के आरोप में दस दिन जेल में रहना पड़ा।