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सुप्रीम कोर्ट: अदालत परिसर में महिलाओं के लिए शौचालय नहीं! याचिका पर जुलाई के पहले सप्ताह में सुनवाई

Mon, 12 Jun 2023 06:11 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तमिलनाडु के ऊटी में एक अदालत परिसर में महिलाओं के लिए शौचालय की सुविधा की कमी के बारे में नीलगिरी के महिला वकील संघ (डब्ल्यूएलएएन) की ओर से दायर याचिका को गर्मी की छुट्टियों के बाद के लिए सूचीबद्ध कर दिया। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तमिलनाडु के ऊटी में एक अदालत परिसर में महिलाओं के लिए शौचालय की सुविधा की कमी के बारे में नीलगिरी के महिला वकील संघ (डब्ल्यूएलएएन) की ओर से दायर याचिका को गर्मी की छुट्टियों के बाद के लिए सूचीबद्ध कर दिया। न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की अवकाशकालीन पीठ ने मद्रास उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से दाखिल एक रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लिया, जिसमें अदालत परिसर में उपलब्ध सुविधाओं का विवरण दिया गया है।

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सर्वोच्च न्यायालय ने इससे पहले मद्रास उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री को निर्देश दिया था कि वह ऊटी में हाल ही में उद्घाटन किए गए संयुक्त अदालत परिसर में महिला वकीलों के लिए शौचालयों की कमी को दूर करने के लिए उठाए गए उपायों पर एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करे। शीर्ष अदालत ने नौ जून को कहा था कि उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल की पिछली रिपोर्ट में नये अदालत परिसर में महिला वकीलों के लिए सुविधाओं के बारे में विस्तार से नहीं बताया गया और यह भी नहीं बताया गया कि क्या पहले उपलब्ध ऐसी सुविधाओं में कोई कमी आई है।

पीठ ने तब उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री से एक रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था जिसका वह सोमवार को अवलोकन करेगी। पीठ ने कहा, ''उच्च न्यायालय प्रशासन द्वारा रजिस्ट्रार जनरल के जरिए एक विस्तृत रिपोर्ट दायर करने दीजिए। इस तरह की रिपोर्ट इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से रविवार तक इस अदालत की रजिस्ट्री में पहुंचनी चाहिए और इस मामले को 12 जून, सोमवार को सूचीबद्ध किया जाना चाहिए।"
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राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने सात जून को मद्रास उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने नीलगिरी अदालत परिसर में महिला वकीलों के लिए शौचालयों की कमी के मुद्दे को हल करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में बताने की बात कही थी। एनसीडब्ल्यू ने उच्च न्यायालय को लिखे अपने पत्र में कहा था कि जून 2022 में उद्घाटन किए गए और कई सुविधाओं से भरपूर नए अदालत परिसर में चौंकाने वाला एक जरूरी शौचालय का अभाव है, जहां महिला वकील जा सकें। 

पत्र में आगे कहा गया था कि इसने महिला वकीलों को एक असहज और अमर्यादित स्थिति में छोड़ दिया है, जिन्हें अपने पेशेवर कर्तव्यों का पालन करते समय बुनियादी स्वच्छता आवश्यकताओं के साथ संघर्ष करना पड़ रहा है। यह जानकर निराशा हुई कि नीलगिरी में महिला वकील पिछले 25 वर्षों सेअदालत परिसर में शौचालय की मांग कर रही हैं।

एनसीडब्ल्यू ने उच्च न्यायालय को लिखे अपने पत्र में कहा था कि महिलाओं की वैध और बुनियादी जरूरतों की लंबे समय तक उपेक्षा न केवल उनके अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि अपनी कानूनी जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाने की उनकी क्षमता में भी बाधा डालती है। 

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