राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज कुमार झा और निर्दलीय सांसद अजीत कुमार भुइयां ने केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुभाष सरकार से सवाल पूछा था कि क्या शिक्षा मंत्री यह बताने का कष्ट करेंगे कि कोविड ड्यूटी के दौरान मरने वाले सरकारी और गैर-सरकारी स्कूल शिक्षकों की संख्या कितनी थी, इसका राज्यवार ब्यौरा क्या है, कितने शिक्षक परिवारों को मुआवजा दिया गया और मुआवजे के पात्र शिक्षकों की संख्या कितनी हैं।
कोविड 19 महामारी के दौरान शहरों और गांवों में कोविड ड्यूटी कर रहे शिक्षकों की मौत कोरोना से नहीं होने के मसले पर शिक्षा मंत्रालय विपक्ष के निशाने पर आ गया है। हाल ही में संसद में पूछे गए सवाल के जवाब में शिक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि कोविड ड्यूटी के दौरान किसी भी शिक्षक की मौत कोरोना संक्रमण की वजह से नहीं हुई है, जबकि पूर्व में आई कई रिपोर्ट्स में ये सामने आया था कि कोविड ड्यूटी और चुनाव में ड्यूटी कर रहे कई शिक्षक कोरोना के चपेट में आ गए जिससे उनकी मौत हो गई।
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राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज कुमार झा और निर्दलीय सांसद अजीत कुमार भुइयां ने केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुभाष सरकार से सवाल पूछा था कि क्या शिक्षा मंत्री यह बताने का कष्ट करेंगे कि कोविड ड्यूटी के दौरान मरने वाले सरकारी और गैर-सरकारी स्कूल शिक्षकों की संख्या कितनी थी, इसका राज्यवार ब्यौरा क्या है, कितने शिक्षक परिवारों को मुआवजा दिया गया और मुआवजे के पात्र शिक्षकों की संख्या कितनी हैं।
विपक्षी सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए शिक्षा राज्यमंत्री ने कहा कि, केंद्रीय विद्यालयों, जवाहर नवोदय विद्यालयों और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के कुल 327 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मियों की कोविड-19 के कारण मौत हो गई। लेकिन उनमें से किसी भी शिक्षक की मौत कोविड ड्यूटी के दौरान नहीं हुई। सरकार के पास इसका कोई भी राज्यवार डेटा नहीं है। शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है और केंद्र सरकार के स्वामित्व वाले व वित्तपोषित स्कूलों को छोड़कर, अन्य सभी स्कूल राज्य सरकारों के क्षेत्राधिकार के तहत आते हैं।
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कोविड के दौरान सैकड़ों शिक्षकों की हुई मौत
इस साल के शुरू में कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान कोविड ड्यूटी और चुनाव ड्यूटी दोनों में ही सेवाएं देने वाले शिक्षकों के मरने की खबरें आई थीं। हालांकि, सदन में पूछे गए सवालों में चुनाव या मतदान शब्द का कोई जिक्र नहीं किया गया है। संसद में शिक्षा मंत्रालय की तरफ से राज्यवार कोई डाटा नहीं दिया गया है लेकिन कुछ अनुमानों में कहा गया है कि अकेले उत्तर प्रदेश में कोविड-19 के कारण दर्जनों शिक्षकों की मौत हुई है।
इस साल के शुरू में आरएसएस से जुड़े राष्ट्रीय शिक्षक महासंघ ने भी दावा किया था कि राज्य में पंचायत चुनाव ड्यूटी पर तैनात 135 शिक्षकों की मौत कोविड-19 के कारण हुई है। जबकि जुलाई में आई एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया था कि चुनाव सम्पन्न होने के बाद शिक्षक संघों में मरने वालों की संख्या 1,621 बताई थी और उत्तर प्रदेश सरकार ने 1,071 शिक्षकों और शिक्षण कर्मचारियों के परिवारों को मुआवजे का वादा किया था। जबकि मई में आई एक रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली में दूसरी लहर के दौरान सरकारी स्कूल के 120 शिक्षकों की कोविड-19 से मृत्यु हुई थी।