आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में हालत बिगड़े हुए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में सर्वदलीय समिति रविवार सुबह श्रीनगर पहुंची। समिति विभिन्न संगठनों के साथ बैठक करके समस्या के समाधान को खोजने की कोशिश करेगी।
इसके बाद डिप्टी सीएम निर्मल सिंह ने कान्फ्रेंस कर कहा कि दरवाजे सभी के लिए खुले हैं, अगर अलगाववादी चाहें तो सर्वदलीय समिति से मुलाकात कर सकते हैं। इसी विषय पर पाठकों की राय जानने के लिए अमर उजाला डॉट कॉम ने अपने पाठकों से सवाल पूछा कि कश्मीर के मौजूदा हालात में क्या अलगाववादियों के साथ बातचीत सही कदम है?
पाठकों की प्रतिक्रिया जानने के लिए तीन विकल्प दिए गए थे। पहला- हां, अलगाववादियों से बातचीत का फैसला सही है, दूसरा- नहीं और तीसरा- कुछ नहीं सह सकते। ऑनलाइन पोल में कुल 3,626 पाठकों ने हिस्सा लिया। सबसे अधिक 68.34 फीसद यानी 2,478 पाठकों ने दूसरे यानी न वाले विकल्प को चुना। इनका मानना है कि अलगाववादियों से बातचीत करने के कोई समाधान नहीं निकलेगा। 29.26 फीसद यानी 1,061 लोगों का यह मानना हां और 2.4 फीसद यानी 87 लोगों का मानना है, कुछ कह नहीं सकते।