केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को दावा किया कि देश में टीबी रोधी दवाओं (Anti TB Drugs) की कोई कमी नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि सभी दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं और करीब छह महीने या उससे ज्यादा दिनों का स्टॉक मौजूद है। बता दें कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि देश में टीबी रोधी दवाओं की कमी है, साथ ही राष्ट्रीय टीबी निवारण कार्यक्रम के तहत दी जा रहीं इन दवाओं के असर पर भी सवाल खड़े किए गए थे।
अब स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन खबरों को गलत बताया और दावा किया कि देश में टीबी रोधी दवाओं की कोई कमी नहीं है। टीबी मरीजों को ड्रग सेंसेटिव इलाज में दो महीने के लिए चार दवाओं आइसोनियाजिड, रिफामपिसिन, एथामबुटोल और पिराजिनामाइड का कोर्स कराया जाता है। इसके बाद अगले दो महीनों तक तीन दवाओं आइसोनियाजिड, रिफामपिसिन और एथामबुटोल का कोर्स कराया जाता है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि ये सभी दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।
टीबी के मल्टी ड्रग प्रतिरोधी इलाज में आमतौर पर चार महीने के लिए सात दवाएं बेडाक्विलिन, लीवोफ्लोक्सेसिन, क्लोफैजामाइन, आइसोनियाजिड, एथामबुटोल, पिराजिनामाइड और एथियोनामाइड शामिल हैं। इसके बाद अगले पांच महीनों तक चार दवाएं लीवोफ्लोक्सेसिन, क्लोफैजामाइन, पिराजिनामाइड और एथामबुटोल शामिल हैं।