कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए उनकी आवाज का नमूना देने संबंधी याचिका पर तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया। अदालत ने माना कि जांच के दौरान कौन-से साक्ष्य जुटाने हैं, इसका निर्णय जांच एजेंसी का अधिकार क्षेत्र है। बाद में न्यायाधीश ने स्वयं को मामले की सुनवाई से अलग कर दिया और इसे मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेज दिया।
तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से मंगलवार को कोई राहत नहीं मिली। अदालत ने उस याचिका पर तत्काल हस्तक्षेप से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने भड़काऊ टिप्पणी से जुड़े एक मामले की जांच के दौरान अपनी आवाज का नमूना (वॉयस सैंपल) लेने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी थी।
विज्ञापन
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने टिप्पणी की कि जांच के लिए क्या आवश्यक है और क्या नहीं, यह तय करना अदालत का काम नहीं, बल्कि जांच एजेंसी का अधिकार है। उन्होंने कहा कि अदालत जांच एजेंसी को यह निर्देश नहीं दे सकती कि उसे जांच के दौरान कौन-सा साक्ष्य जुटाना चाहिए। इसके बाद न्यायमूर्ति घोष ने स्वयं को मामले की सुनवाई से अलग कर लिया और याचिका को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेज दिया, जो यह तय करेंगे कि मामले की सुनवाई किस पीठ के समक्ष होगी।
चुनाव प्रचार के दौरान अभिषेक ने दिया था भड़काऊ बयान
यह मामला विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान अभिषेक बनर्जी की कथित भड़काऊ टिप्पणी से जुड़ी एफआईआर से संबंधित है, जिसकी जांच पश्चिम बंगाल सीआईडी कर रही है। इससे पहले अभिषेक ने एफआईआर रद्द करने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उस मामले में उन्हें 31 जुलाई तक अंतरिम संरक्षण मिला हुआ है। साथ ही अदालत ने उन्हें जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश भी दिया था।
विज्ञापन
इसी जांच के सिलसिले में सीआईडी ने हाल ही में बिधाननगर अदालत से अभिषेक बनर्जी की आवाज का नमूना लेने की अनुमति मांगी थी। निचली अदालत ने आवेदन स्वीकार करते हुए 30 जून को मजिस्ट्रेट और फोरेंसिक विशेषज्ञ की मौजूदगी में वॉयस सैंपल लेने का निर्देश दिया था। सीआईडी ने इस संबंध में नोटिस भी उनके कालीघाट स्थित आवास पर पहुंचाया था।
अभिषेक की याचिका पर हाईकोर्ट ने की क्या टिप्पणी?
अभिषेक बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में दलील दी कि संबंधित बयान उन्होंने सार्वजनिक राजनीतिक सभा में दिया था और उसके दिए जाने से इनकार भी नहीं किया गया है। ऐसे में आवाज का नमूना लेने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि चूंकि मूल मामला पहले से ही दूसरी पीठ के समक्ष लंबित है और उसमें अभिषेक बनर्जी को अंतरिम संरक्षण प्राप्त है, इसलिए अलग से अंतरिम राहत देने का कोई औचित्य नहीं बनता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर जांच में सहयोग नहीं किया जाता है तो जांच एजेंसी संबंधित पीठ के समक्ष आवश्यक कार्रवाई की मांग कर सकती है। मंगलवार को ही वॉयस सैंपल लिए जाने की तिथि निर्धारित थी। हाईकोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिलने के बाद अब मामले की आगे की कार्रवाई और मुख्य न्यायाधीश द्वारा नई पीठ के गठन पर सभी की नजरें टिकी हैं।