भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा बीते मंगलवार को नीतिगत दरों में 25 आधार अंकों की कटौती के बावजूद लोन लेने वाले ग्राहकों के ईएमआई में कोई खास कमी नहीं आई है। दरअसल, वाणिज्यिक बैंक कोष जुटाने की औसत लागत के आधार पर ब्याज दरें तय करने की प्रणाली (एमसीएलआर) का हवाला दे कर लोन पर ब्याज दर कम करने से बच रहे हैं। जबकि सच्चाई यह है कि अधिकतर बैंकों के फंसे कर्ज (एनपीए) की मात्रा इस समय इतनी अधिक है कि वे चाह कर भी ग्राहकों को ज्यादा राहत नहीं दे पा रहे हैं।
रिजर्व बैंक के नए गवर्नर उर्जित पटेल ने बीते मंगलवार को अपनी पहली नीतिगत दरों की घोषणा की जिसमें मुख्य दरों में 0.25 फीसदी की कटौती की गई। इस कटौती के बाद रेपो रेट 6.5 फीसदी से घटकर 6.25 फीसदी हो गया है। इसका मतलब ये है कि अब बैंकों को आरबीआई से सस्ता कर्ज मिल सकेगा और उम्मीद की जा सकती है कि वो उसका फायदा ग्राहकों तक भी पहुंचाएंगे।
लेकिन इसके बाद जिन बैंकों ने अपने नए एमसीएलआर की घोषणा की, उनकी औसत कटौती पांच आधार अंकों की ही थी। अभी तक पंजाब एंड सिंध बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक आफ इंडिया, सिंडिकेट बैंक, आइसीआईसीआई बैंक आदि ने नई एमसीएलआर की घोषणा कर दी है।