अब सड़क हादसों के शिकार लोगों की मदद करने वाले को पुलिस प्रताड़ना से दो-चार नहीं होना पड़ेगा। इस काम के लिए अब उन्हें इनाम मिलेगा। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने सड़क दुर्घटना के पीड़ितों की मदद करने वालों (गुड समेरिटन) को पुलिस प्रताड़ना से बचाने संबंधी केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों को मंजूरी दे दी। इसकेतहत अब दुर्घटना पीड़ितों को नजदीकीअस्पताल में पहुंचाने वालों को पुलिसिया सवाल-जवाब के लिए वहां रुकना नहीं पड़ेगा और न ही उन्हें अपनी पहचान बताने केलिए बाध्य किया जा सकेगा।
न्यायमूर्ति वी गोपालगौड़ा और न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की पीठ ने केंद्र सरकार को इन दिशानिर्देशों को प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में बड़े स्तर पर प्रचार-प्रचार करने के लिए कहा है, जिससे कि लोग दुर्घटना पीड़ितों की मदद केलिए सामने आएं। इसकेसाथ ही अदालत ने सेव लाइफ फाउंडेशन नामक एक संगठन द्वारा दाखिल याचिका का निपटारा कर दिया।
सेव लाइफ फाउंडेशन केसर्वेक्षण में पाया गया था कि चार में से तीन यानी 75 फीसदी लोग सड़क दुर्घटना पीड़ितों की मदद के लिए आगे नहीं आते। विधि आयोग की 201वीं रिपोर्ट में कहा गया था कि डॉक्टरों के मुताबिक 50 फीसदी मामले में दुर्घटना पीड़ितों की जान बचाई जा सकती है अगर उन्हें एक घंटे के भीतर अस्पताल में दाखिल करा दिया जाए। देश में हर वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में 1.37 लाख लोगों की मौत होती है।
मालूम हो कि गत वर्ष दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने वालों को प्रोत्साहित करने केमद्देनजर सरकार ने कई दिशानिर्देश जारी किए थे। सुप्रीम कोर्ट केनिर्देश केबाद केंद्र सरकार ने ये दिशानिर्देश जारी किए थे। शीर्ष अदालत द्वारा इस दिशानिर्देश को हरी झंडी मिलने केबाद देश केतमाम अस्पताल, पुलिस सहित अन्य अथॉरिटी को गंभीरता से इसका पालन करना होगा।
ऐतिहासिक कदम
सुप्रीम कोर्ट ने सड़क दुर्घटना के पीड़ितों की मदद करने वालों को पुलिस प्रताड़ना से बचाने संबंधी केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों को मंजूरी दे दी है। इस वजह से मददगारों का काम आसान हो गया है।
हादसों की हकीकत
सेव लाइफ फाउंडेशन के सर्वे के मुताबिक 75 फीसदी लोग मदद के लिए आगे नहीं आते।
दुर्घटना के पहले घंटे में पीड़ितों को अस्पताल ले आने पर आधे लोग बच सकते हैं।
देश में हर साल सड़क हादसों में 1.37 लाख लोग मौत के शिकार हो जाते हैं।