राज्यसभा में विपक्ष ने सवाल किया कि क्या सरकार के पास उपयुक्त संशोधनों के साथ एनजेएसी को फिर से शुरू करने का प्रस्ताव है? कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने एक लिखित जवाब में कहा कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।
राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) पर विधेयक को फिर से पेश करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार ने गुरुवार को राज्यसभा को इसकी जानकारी दी।
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राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और माकपा के जॉन ब्रिटास ने सवाल किया कि क्या सरकार के पास उपयुक्त संशोधनों के साथ एनजेएसी को फिर से शुरू करने का प्रस्ताव है? कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने एक लिखित जवाब में कहा कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।
एनजेएसी अधिनियम को 2015 में शीर्ष अदालत ने रद्द कर दिया था। इस अधिनियम ने सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति की कॉलेजियम प्रणाली को उलटने की मांग की थी। एजेएसी बिल और एक संविधान संशोधन संसद द्वारा लगभग सर्वसम्मति से पारित किया गया था। रिजिजू कॉलेजियम प्रणाली पर हमला करते रहे हैं, इसे संविधान के लिए 'एलियन' बताते रहे हैं।
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उपराष्ट्रपति और राज्यसभा स्पीकर जगदीप धनखड़ ने बुधवार को उच्च सदन में अपने पहले भाषण में एनजेएसी कानून को खत्म करने के लिए न्यायपालिका की आलोचना की। धनखड़ ने इसे संसदीय संप्रभुता से गंभीर 'समझौता' करार दिया और कहा कि तीनों अंगों को 'लक्ष्मण रेखा' का सम्मान करना चाहिए।
धनखड़ ने हाल के दिनों में इससे पहले दो मौकों पर इसी तरह के विचार व्यक्त किए थे। उन्होंने हाल में ही इसे एक 'गंभीर' मामला बताया था। उन्होंने कहा था कि शीर्ष अदालत द्वारा एनजेएसी कानून को रद्द किए जाने के बाद संसद में 'कोई कानाफूसी' तक नहीं हुई थी।