फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पॉलिटिक्स ऑफ शरद पवार: देवेंद्र फडणवीस से मिल कर लौटे अजीत पवार के हाथ कुछ नहीं आया

Thu, 12 Dec 2019 08:21 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
शरद पवार और उद्धव ठाकरे - फोटो : पीटीआई (सांकेतिक)
विज्ञापन
यह शरद पवार की राजनीतिक शैली है। उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में कई बार इसका लोहा मनवाया। महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की सरकार बनवाने में शरद पवार की भूमिका ने इसे नई ऊंचाइयां दीं। अब सरकार की स्थिरता, मंत्रालय के बंटवारे में भी शरद पवार राजनीतिक कौशल दिखा रहे हैं। शिवसेना के एकनाथ शिंदे गृह, शहरी विकास, पर्यटन, पर्यावरण और संसदीय कार्य मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली है। वह महाराष्ट्र में शिवसेना प्रमुख और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के लेफ्टिनेंट बन गए हैं। जबकि शरद पवार के भतीजे अजित पवार को अभी तक कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिल पाई।

 

शरद पवार ने छगन भुजबल पर फिर भरोसा जताया है। छगन भुजबल को वह नब्बे के दशक में शिवसेना से तोड़कर लाए थे। भुजबल के पास ग्रामीण विकास, जल संसाधन, सामाजिक न्याय, राज्य उत्पाद शुल्क जैसा अहम विभाग है। वहीं अजीत पवार के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ शपथ लेने के बाद एनसीपी विधायक दल के नेता का स्थान लेने वाले जयंत पाटिल को वित्त, योजना, आवास-विकास, खाद्य आपूर्ति और श्रम मंत्रालय मिला है। कांग्रेस के कोटे से बाला साहेब थोराट को स्कूली शिक्षा, राजस्व, पशुपालन, मत्स्य पालन जैसा विभाग मिला है।

विज्ञापन


जबकि कांग्रेस के दूसरे मंत्री नितिन राउत को पीडब्ल्यूडी जैसा अहम मंत्रालय दिया गया है। इस तरह से उद्धव ठाकरे ने अपने मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों के विभागों का भी बंटवारा कर दिया है। सूत्र बताते हैं विभागों के बंटवारे में शरद पवार की सलाह ने शिवसेना, कांग्रेस को साथ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अजीत पवार को कुछ नहीं मिला

शरद पवार के भतीजे अजित पवार को अभी कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली है। अजित पवार अपने चाचा शरद पवार की कोशिशों के बाद पार्टी में लौट आए थे। अजीत पवार के बागी रुख त्यागने के बाद शरद पवार, उनकी बेटी सुप्रिया सूले समेत तमाम सदस्यों ने अजीत का स्वागत किया था। कुछ ही दिन पहले अजीत पवार ने महाराष्ट्र का उपमुख्यमंत्री बनने की भी मंशा जताई थी। हालांकि शरद पवार का मानना है कि उपमुख्यमंत्री जैसा पद संविधान की व्यवस्था में नहीं आता। एनसीपी नेता के अनुसार यह एक पोलिटिकल कास्मेटिक पद है। इस तरह से अजित पवार की जिम्मेदारी को लेकर अभी भी संशय बना है।

 

एनसीपी के एक बड़े नेता की मानें तो पवार की पकड़ ढीली नहीं होती। सूत्र का कहना है कि देवेंद्र फडणवीस के साथ अजित पवार के जाने के बाद कोई दूसरा दल या शरद पवार के स्थान पर कोई और नेता होता तो कुछ भी हो सकता था। लेकिन यह शरद पवार ही थे, जिन्हें दरकिनार कर पाना आसान नहीं था। सूत्र का कहना है कि इसी क्षमता के कारण शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री पद की शपथ ले पाए। तो क्या शरद पवार अब अजीत पवार को सबक सिखा रहे हैं, जैसे सवाल पर सूत्र का कहना है कि यह शरद पवार ही जानें। सूत्र का कहना है कि उनके (शरद) मन में क्या चल रहा है, इसका अंदाजा शरद पवार की छाया भी नहीं लगा सकती।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें