जयशंकर ने यह भी कहा कि पहलगाम हमले के बाद भारत की कूटनीति का नतीजा यह हुआ कि संयुक्त राष्ट्र के 190 देशों में से केवल तीन ने ही ऑपरेशन सिंदूर का विरोध किया। इस बात का भारी समर्थन था कि जिस देश पर हमला हुआ है, उसे अपनी रक्षा करने का अधिकार है। विदेश मंत्री ने कहा, 'हमने ऑपरेशन सिंदूर शुरू करने के लिए एक विचार गढ़ने और कूटनीति तैयार करने की कोशिश की। उस कूटनीति का नतीजा यह हुआ कि संयुक्त राष्ट्र के 190 देशों में से पाकिस्तान के अलावा केवल तीन देशों ने ऑपरेशन सिंदूर का विरोध किया।
जयशंकर ने कहा, 'आम तौर पर यह माना गया कि आतंकवाद अस्वीकार्य है और जिस देश पर हमला हुआ है, उसे अपनी रक्षा करने का अधिकार है और भारत ठीक यही कर रहा था।' उन्होंने कहा, 'जब ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया था, तो हमने अपने उद्देश्य सामने रखे थे कि यह पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ढांचे पर हमला करेगा। हमारी कार्रवाई केंद्रित, सोची-समझी और बिना उकसावे वाली थी और हम इस प्रतिबद्धता पर खरे उतरे कि उन हमलों के लिए जिम्मेदार लोगों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।'
जयशंकर ने बताया कि भारतीय कूटनीति के कारण ही अमेरिका ने द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) समूह को एक वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित किया था। उन्होंने कहा, '10 मई को हमें फोन कॉल आए, जिनमें अन्य देशों की यह धारणा साझा की गई कि पाकिस्तान लड़ाई रोकने के लिए तैयार है। जयशंकर ने कहा, 'हमारा रुख यह था कि अगर पाकिस्तान तैयार है, तो हमें डीजीएमओ के जरिए पाकिस्तानी पक्ष से यह अनुरोध मिलना चाहिए। यह अनुरोध ठीक इसी तरह आया।'
उन्होंने कहा, 'मैं दो बातें बिल्कुल स्पष्ट कर देना चाहता हूं, पहली बात- अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत में किसी भी स्तर पर व्यापार या जो कुछ चल रहा था, उससे उनका कोई संबंध नहीं था। दूसरी बात- 22 अप्रैल से जब राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी संवेदना व्यक्त करने के लिए फोन किया था, 17 जून तक, जब उन्होंने कनाडा में मौजूद प्रधानमंत्री मोदी को फोन किया, दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं हुई।'
जयशंकर ने कहा कि भारतीय कूटनीति ने तब पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद को लंबे समय से दिए जा रहे समर्थन को सामने लाने की कोशिश की और यह भी बताया कि कैसे पहलगाम हमले का लक्ष्य जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था थी और इसने सांप्रदायिक कलह को जन्म दिया। दो संदेश थे- आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता और आतंकवादियों से अपने लोगों की रक्षा करने का अधिकार। उन्होंने कहा, 'सभी राजनयिक ब्रीफिंग इन्हीं दो उद्देश्यों पर केंद्रित थीं।'
जयशंकर की यह टिप्पणी सदन में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई की ओर से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 26 बार किए गए दावे पर सरकार की आलोचना के बाद आई है। इसमें उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम के लिए व्यापार का इस्तेमाल करने की बात कही थी। कांग्रेस ट्रंप की इस टिप्पणी को लेकर सरकार पर लगातार हमला बोल रही है।
भारत ने पहलगाम हमले में 26 नागरिकों को खो दिया था। इसके जवाब में 7 मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढांचों को निशाना बनाते हुए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया। भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक सीमा पार से ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद 10 मई को संघर्ष समाप्त करने पर सहमति बनी थी।