तिवारी जी जैसा प्रशासनिक क्षमता वाला और दूरदर्शी मुख्यमंत्री दूसरा नहीं हुआ। कहते थे कि फाइल को समझना है तो डीलिंग क्लर्क की नोटिंग पढ़ो, न कि सचिव और प्रमुख सचिव की। मैं लोक निर्माण मंत्री था। एक मर्तबा की बात है कि मेरे विभाग की एक फाइल तिवारी जी के पास पहुंची। उन्होंने मुझे बुलाया और कहा कि फाइल पढ़ी है। मैने कहा कि पढ़ी तो है।
वह मुस्कराते हुए बोले जिन इंजीनियर साहब ने इसे बनाया है, वे इस इलाके के एमएलए साहबान के क्षेत्र में काफी दिनों से हैं। जितनी सड़क है उस लिहाज से बनाने का एस्टीमेट दूना बना दिया गया है। एक बार टेक्निकल सेल से चेक करा लीजिए। मैने टेक्निकल सेल से चेक कराकर दोबारा एस्टीमेट बनवाया तो वास्तव में वह आधा रह गया।
एक बार मैं तिवारी जी के साथ बैठा था। उत्तरांचल (अब उत्तराखंड) से एक सज्जन आए और तिवारी जी से कांग्रेस पार्टी के एक नेता का नाम लेकर तमाम उन शब्दों का प्रयोग करते हुए, जिनको लिखा नहीं जा सकता, बताने लगे, ‘वह आपको यह कह रहे थे। ऐसा बता रहे थे।’ तिवारी जी खामोश ठुड्ढी के नीचे हाथ लगाए सुनते रहे।
जब वह सज्जन अपनी बात पूरी कर चुके तो तिवारी जी ने उनसे कहा, ‘जाकर मेरा प्रणाम उनसे बोल देना। उन्होंने बड़ी कृपा की जो मेरी इतनी ही कमियां बताईं। मेरे भीतर ऐसी कई और भी कमियां हैं जिन्हें वह जानते हैं और चाहते तो वह भी बोल देते। पर, नहीं बोले, यह क्या कम है।’
- डॉ. अम्मार रिजवी (एनडी तिवारी के सहयोगी और उनके मंत्रिमंडल में सदस्य रहे)