भले ही आपके पास डिग्री या डिप्लोमा न हो, लेकिन अगर आपने उस कोर्स में कुछ समय तक पढ़ाई की तो आप चुनावी नामांकन पत्र में शैक्षणिक योग्यता वाले कॉलम में डिग्री या डिप्लोमा दर्ज कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक विधायक को राहत देते हुए यह बात कही है। शीर्ष अदालत ने साथ ही यह भी टिप्पणी भी कि क्या इस देश में कोई मतदाता उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता को देखकर भी वोट देता है।
न्यायमूर्ति कूरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने यह कहते हुए कि उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें निर्वाचित विधायक की ओर से गलत जानकारी देने पर उन्हें अयोग्य ठहराने की गुहार की गई थी। वर्ष 2014 के तेलंगाना विधानसभा चुनाव में नालगोंडा विधानसभा से दूसरे स्थान पर रहे कंचरालू भूपाल रेड्डी ने विजयी उम्मीदवार कोमातरेड्डी वेंकट रेड्डी पर चुनावी नामांकन पत्र में शैक्षणिक योग्यता वाले कॉलम में गलत जानकारी देने का आरोप लगाया था।
पीठ ने याचिका पर यह कहते हुए विचार करने से इनकार कर दिया कि कोमातरेड्डी ने शैक्षिणक योग्यता वाले कॉलम में जो जानकारी दी है, उसमें कुछ गलत नहीं है। पीठ ने यह देखते हुए कहा कि कोमातरेड्डी ने बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग (बीई) में दाखिला लिया था और उन्होंने चार वर्ष पढ़ाई भी की थी। भले ही वह कोर्स के सभी विषयों में पास न हुए हों और उन्हें डिग्री नहीं मिली, लेकिन नामांकन पत्र में शैक्षणिक योग्यता वाले कॉलम में ‘बीई’ लिखने को गलत नहीं कहा जा सकता। इसे ‘कोर्स कंप्लीटेड’ कहा जा सकता है।
याचिकाकर्ता का कहना था कि चूंकि कोमातरेड्डी ने चुनावी नामांकन पत्र में गलत जानकारी दी थी, लिहाजा उनका निर्वाचन निरस्त किया जाना चाहिए। लेकिन पीठ ने उनकी दलीलों को अस्वीकार करते हुए यह टिप्पणी की कि क्या इस देश में मतदाता किसी उम्मीदवार को उसकी शैक्षणिक योग्यता को देखकर वोट करता है। पीठ ने याचिकाकर्ता को अगले चुनाव में किस्मत अजमाने की बात कहते हुए याचिका को खारिज कर दिया। इससे पहले हाईकोर्ट ने भी कोमातरेड्डी द्वारा नामांकन पत्र में दी गई जानकारी को गलत नहीं ठहराया था।