सपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरणमय नंद का कहना है कि अगले लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में उनकी पार्टी बसपा के साथ मिलकर भाजपा को हराने में सक्षम है और इसके लिए कांग्रेस जैसी नगण्य ताकत की जरूरत नहीं है। हालांकि, उन्होंने संकेत दिया कि सपा-बसपा गठबंधन रायबरेली और अमेठी सीट से छेड़छाड़ नहीं करेगा। रायबरेली सोनिया गांधी और अमेठी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की संसदीय सीट है। दो दिन पहले दिल्ली में बसपा प्रमुख मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच सीटों के बंटवारे पर बातचीत हुई थी।
राज्य की वाम मोर्चा सरकार में लंबे समय तक मंत्री रहे नंद ने कहा, ‘उत्तर प्रदेश में कांग्रेस एक नगण्य ताकत है। इसलिए गठबंधन में उसे शामिल करने या नहीं करने के मुद्दे पर विचार तक नहीं किया गया। वहां सपा-बसपा ही मुख्य ताकतें हैं। कांग्रेस राज्य में एक दो सीटें जीत सकती है। कांग्रेस अब तक गठजोड़ की राजनीति के मंत्र से तालमेल नहीं बिठा सकी है। वह उन राज्यों में अपने सहयोगियों के लिए एक इंच जमीन छोड़ने को तैयार नहीं है, जहां वह मजबूत है। लेकिन जहां कमजोर है वहां वह सहयोगी दलों से अपना हिस्सा चाहती है।’
हाल में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए सपा नेता ने कहा कि अगर कांग्रेस ने राजस्थान और मध्य प्रदेश में सपा और बसपा के साथ गठबंधन किया होता तो वहां भाजपा का सूपड़ा साफ हो जाता। क्या कांग्रेस को गठबंधन से बाहर रखने की स्थिति में भाजपा को फायदा नहीं होगा? इस सवाल पर सपा नेता ने कहा कि कांग्रेस के वोटों का हिस्सा बहुत कम है। इसलिए इससे सपा-बसपा को कोई नुकसान नहीं होगा।