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शरीयत में किसी तरह का दखल मंजूर नहीं, SC के फैसले से मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड नाखुश

Mon, 11 Sep 2017 07:56 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, भोपाल
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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने कहा है कि देश के संविधान ने सभी को मजहबी आजादी दी है लिहाजा उसे शरीयत में किसी भी तरह का दखल मंजूर नहीं है। पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के हाल में आए फैसले पर नाखुशी जाहिर करते हुए इसे पर्सनल लॉ पर हमला माना है।
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हालांकि बोर्ड ने शरिया कानून में सुधार के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाने का फैसला किया है। यह समिति 10 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।

इस पर उत्तरप्रदेश में होने वाली अगली बैठक में विचार होगा। रविवार को यहां हुई बोर्ड की मैराथन बैठक में तीन तलाक के साथ अयोध्या में राम मंदिर - बाबरी मस्जिद विवाद पर भी चर्चा हुई।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने विगत 22 अगस्त को अपने फैसले में एक बार में ही तीन तलाक कहने (तलाक-ए-बिद्दत) की परंपरा को असंवैधानिक मानते हुए गैरकानूनी बताया था।
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पांच जजों की बेंच के 3-2 के बहुमत से आए इस फैसले पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तत्काल कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया था। रविवार को भोपाल की बैठक में अगली रणनीति का खुलासा करने की बात कही थी। लिहाजा इस बैठक पर सबकी नजरें थीं। 

सूत्रों का कहना है कि कई सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। हालांकि शुरुआत में बोर्ड के महासचिव मौलाना सैयद मोहम्मद वली रहमानी ने मीडिया से इतना भर कहा कि तीन तलाक के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हम नाखुश हैं।

बाद में बोर्ड ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि कोर्ट के प्रति पूरा सम्मान है पर मुस्लिम पर्सनल लॉ पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। बोर्ड मेंबर कमल फारुकी ने यह भी कहा कि बोर्ड सुधारवादी कार्यक्रम चलाएगा। इस बारे में सुझाव देने के लिए विशेषज्ञों की कमेटी बनाई जाएगी। बाबरी मस्जिद विवाद पर फैसला कोर्ट में होगा।
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