यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार स्वतंत्र रूप से चलेगी? ये सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि ऐसी खबर है कि प्रधानमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी नृपेंद्र मिश्रा को लखनऊ में राज्य की प्रशासनिक नियुक्तियों को निगरानी के लिए तैनात किया जा सकता है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि नृपेंद्र मिश्रा यूपी के देवरिया के रहनेवाले हैं और जोगी को सीएम बनाने में उनकी भूमिका भी अहम मानी जा रही है। हालांकि, पीएमओ इस खबर को सिरे से खारिज कर दिया है।
इकोनॉमिक्स टाइम्स की खबर के मुताबिक, योगी सरकार के कामकाज में पीएमओ दखलंदाजी नहीं करेगा। अखबार ने शीर्ष सरकारी अधिकारियों और बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत के आधार पर लिखा है कि सीएम जोगी को काम करने की पूरी आजादी होगी और पीएमओ का किसी तरह का दबाव नहीं होगा। अधिकारियों ने अखबार को बताया है कि पीएम के प्रिंसिपल सेक्रेटरी नृपेंद्र मिश्रा की लखनऊ में तैनाती की खबर पूरी तरह से बकवास है। एक अधिकारी ने बताया, ‘कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में जिस दिन मिश्रा के लखनऊ में होने की खबर दी गई थी, उस रोज वह दिल्ली में थे। हम इन खबरों से हैरान हैं।’
वहीं बीजेपी के एक बड़े नेता ने कहा कि बड़े अधिकारियों की नियुक्ति में केन्द्र जरूर बातचीत करेगा। हालांकि ऐसी नियुक्तियों में मुख्यमंत्री के सुझावों का ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी नियुक्तियों में भी आम सहमति बनाने की कोशिश होगी। इस नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री पर कुछ भी थोपा नहीं जाएगा। एक बड़े अधिकारी ने बताया कि केंद्र सरकार पॉलिसी को लेकर एक आइडिया दे सकता है। उन्होंने कहा कि यूपी की अहमियत को देखते हुए अगर राज्य सरकार कोई राय मांगती है तो उसका जवाब केंद्र तुरंत देगा।
पार्टी के एक अन्य नेता ने बताया कि योगी आदित्यनाथ को सरकार को चलाने की छूट होगी और दूसरे अपॉइंटमेंट्स वही करेंगे। उन्होंने कहा कि बीजेपी शासित राज्यों के नेता केंद्र के साथ तालमेल रखते हैं और यूपी के साथ भी ऐसा ही होगा। उन्होंने बताया, ‘हम मध्य प्रदेश सरकार के काम में दखलंदाजी नहीं करते, फिर यूपी में हमें ऐसा क्यों करना चाहिए।’