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नागाओं की हत्या में किसकी भूमिका?: उपमुख्यमंत्री डिखो ने किस पर लगाए आरोप; नेमचा को इस्तीफा देने को क्यों कहा?

Wed, 28 Oct 2026 04:51 PM IST
निर्मल कांत पीटीआई, इंफाल।

सार

मणिपुर में नागा लोगों की हत्या को लेकर उपमुख्यमंत्री लोसी डिखो ने दूसरी उपमुख्यमंत्री नेमचा के पति के संगठन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि संगठन की भूमिका पर उन्हें कोई संदेह नहीं है और नेमचा को पद छोड़ देना चाहिए या हिंसा रोकनी चाहिए। लोसी डिखो ने क्या कहा? पढ़िए इस रिपोर्ट में। 
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लोसी डिखो - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एक्स/लोसी डिखो
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विस्तार
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मणिपुर के उपमुख्यमंत्री लोसी डिखो ने बुधवार को कहा कि उन्हें इस बात पर 'कोई संदेह नहीं' है कि दूसरी उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन के पति के नेतृत्व वाले कुकी उग्रवादी संगठन की इस साल की शुरुआत में नागा समुदाय के पुरुषों की हत्या में भूमिका थी। उन्होंने कहा, नेमचा किपगेन को या तो अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या हिंसा रोकने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करना चाहिए।
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डिखो ने अपने आरोप के समर्थन में उन लोगों से हुई बातचीत का हवाला दिया, जिन्हें बंधक बनाए जाने के बाद रिहा किया गया था। उन्होंने पीटीआई को दिए साक्षात्कार में यह भी बताया कि केंद्र के प्रतिनिधि और 'राजनीतिक एजेंसियां' राज्य के नागा विधायकों से संपर्क कर रही हैं। इसका उद्देश्य नेमचा किपगेन के खिलाफ कार्रवाई की उनकी मांग पर आपसी सहमति बनाना है।

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उनके पति थांगबोई किपगेन कुकी नेशनल फ्रंट (प्रेसिडेंट) यानी केएनएफ (पी) के प्रमुख हैं। यह उन कुकी सशस्त्र समूहों में शामिल है, जो केंद्र सरकार, मणिपुर सरकार और कुकी सशस्त्र समूहों के बीच हुए त्रिपक्षीय अभियान निलंबन समझौते (एसओओ) के दायरे में आते हैं। 

इस साल मई-जून में कांगपोकपी और सेनापति में नागा और कुकी समुदायों के बीच बंधक बनाने की घटना हुई थी। इस दौरान छह नागा पुरुषों का अपहरण कर उनकी हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद दोनों समुदायों के बीच तनाव काफी बढ़ गया। मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) कर रही है। नेमचा किपगेन पहले ही उग्रवादियों के साथ मिलीभगत के आरोपों से इनकार कर चुकी हैं।  

सेनापति में मुख्य रूप से नागा समुदाय के लोग रहते हैं। वहीं, कांगपोकपी में कुकी-जो समुदाय के लोगों की आबादी अधिक है। हालांकि, यहां कई ऐसे इलाके भी हैं, जहां नागा समुदाय के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं। दोनों समुदायों के बीच मतभेद गहरे हैं। इनके बीच जमीन पर बना तनाव अब राज्य सरकार के शीर्ष स्तर तक भी पहुंच गया है।

कांगपोकपी जिले में हिंसा के लिए केएनएफ (पी) को जिम्मेदार ठहराते हुए डिखो से कहा, उन्हें (नेमचा किपगेन को) कहना चाहिए, मैं राज्य की उपमुख्यमंत्री हूं। मेरे पति का संगठन लोगों से लड़ाई क्यों कर रहा है और उनकी हत्या क्यों कर रहा है? 

सेनापति जिले के माओ से नागा पीपुल्स फ्रंट के तीन बार विधायक रह चुके डिखो ने आगे कहा, उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। अगर वह अपना पद नहीं छोड़ना चाहती हैं, तो उन्हें तुरंत अपने पति के संगठन से नागाओं के साथ लड़ाई और उनकी हत्या रोकने के लिए कहना चाहिए। 

कब हुई थी दोनों उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति?
डिखो के आरोपों से दोनों उपमुख्यमंत्रियों के बीच मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आ गए हैं। दोनों की नियुक्ति फरवरी में हुई थी। उस समय मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह के नेतृत्व में भाजपा की अगुवाई वाली सरकार ने कार्यभार संभाला था। डिखो नागा समुदाय से हैं, किपगेन कुकी समुदाय से और खेमचंद मैतेई समुदाय से हैं। इन नियुक्तियों के पीछे हिंसा से प्रभावित पूर्वोत्तर राज्य में जातीय संतुलन बनाने की कोशिश थी।

उनकी पार्टी नागा पीपुल्स फ्रंट भाजपा के नेतृत्व वाली मणिपुर सरकार में साझेदार है। नगालैंड में भी यह पार्टी भाजपा के सहयोगी के रूप में सरकार का नेतृत्व करती है। इसके अलावा, यह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का भी हिस्सा है।
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गृह मंत्री अमित शाह को क्यो लिखा था पत्र?
अगस्त के आखिरी दिनों में डिखो और मणिपुर के नौ में से सात अन्य नागा विधायकों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा था। उन्होंने नेमचा किपगेन के खिलाफ कार्रवाई करने, नागाओं पर हमलों में कथित रूप से शामिल कुकी उग्रवादी नेताओं को गिरफ्तार करने और एसओओ समझौते को रद्द करने की मांग की थी।
 
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