कमिश्नर राजन शुक्ला ने निर्देश जारी किए हैं कि इलाहाबाद समेत कानपुर, उन्नाव और फतेहपुर के जिन गांवों में शवों को प्रवाहित करने की प्रथा है, वहां माघ मेला तक इस पर रोक लगा दी जाए। इसके बावजूद कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की जाए। कमिश्नर ने शुक्रवार को गंगा की अविरलता एवं निर्मलता को लेकर इलाहाबाद समेत फतेहपुर, कानपुर और उन्नाव के अफसरों के साथ बैठक की।
मंडलायुक्त ने सभी जगह के अपर जिलाधिकारियों से कहा कि जहां शवों को गंगा में प्रवाहित करने की प्रथा है, वहां हलफनामा ले लिया जाए कि माघ मेला तक ऐसा नहीं होगा। इसके अलावा ऐसे स्थानों को चिह्नित कर वहां जाल लगा दिया जाए। कोई नहीं मानता है तो उसके खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज कराई जाए।
मेला क्षेत्र में आयोजित बैठक के दौरान कमिश्नर ने गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के जीएम को निर्देश दिया कि अनटैप्ड नालों के पानी को शोधित करने के बाद ही गंगा में छोड़ा जाए। यह भी कहा कि मोरी नाले के गंदे पानी को डायवर्ट कर गऊघाट सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में शुद्ध करने के बाद नदी में छोड़ा जाए।
सिंचाई विभाग के अफसरों से कहा कि नरौरा और टिहरी से जल छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा डलमऊ-1 एवं 2 पम्प कैनालों को बंद कर पानी गंगा में प्रवाहित किया जाए। साथ ही स्नान के दिनों में कानपुर बैराज से भी गंगा में जल छोड़ा जाए।