एनआईए अफसर तंजील अहमद की हत्या के बाद उठे उस सवाल पर मुनीर ने विराम लगा दिया, जिसमें हत्या के तार किसी दहशतगर्दों के संगठन से जोड़े जा रहे थे। खुद एनआईए सहित सभी एजेंसियों को मुनीर ने जवाब दे दिया। चूंकि सिमी का बेस अलीगढ़ रहा है। इसलिए सिमी को लेकर भी वह कोई जानकारी नहीं दे सका। बस अपराध ही अपना मकसद बताया।
इसके लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार था और उसने खुलासा किया कि अगर तंजील अहमद की हत्या न होती तो शायद अब तक वह आशुतोष मिश्रा को रिहा भी करा चुका होता। चाहे उसके लिए उसे कुछ भी करना पड़ता। मंगलवार रात जब उसे आशुतोष मिश्रा से मिलवाया गया तो दोनों गले मिलकर खूब फूट-फूटकर रोये।
एके-47 आती तो अलीगढ़ में होती कई बड़ी हत्याएं
पूछताछ एजेंसियों से जुड़े सूत्रों की मानें तो उन्हें अंदेशा था कि मुनीर की गिरफ्तारी के बाद उससे उन्हें सिमी या अन्य किसी आतंकी संगठन को लेकर कोई सटीक सूचना मिलेगी। मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ। उसने इतना ही बताया कि एएमयू और दिल्ली की जामिया व बटला की जरायम दुनिया में उसकी गहरी पैंठ थी।
इसी दम पर वह अपराध जगत में लगातार आगे बढ़ रहा था। एएमयू में आलमगीर हत्याकांड के बाद वह एके-47 लेने की जुगत में लगा। इसीलिए उसने बिजनौर में 90 लाख रुपये लूटे थे। दिल्ली की डेढ़ करोड़ लूट में उसने कुछ रकम बिजनौर में जमीन खरीदने में लगा दी तो कुछ अपने मामा को दे दी।
मगर तंजील के आड़े आने के कारण वह न तो एके-47 ले सका और उन्हीं की वजह से उसकी 60 लाख रुपये की रकम डूब गई। एके-47 लेने के पीछे उसने दूसरा बड़ा मकसद अलीगढ़ से जुड़े कुछ बड़े दिग्गज विरोधियों का सफाया बताया था, जो आशुतोष और खुद के मुकदमों में बाधक बन रहे थे और वह लोग रसूखदार होने के कारण आसानी से हाथ नहीं आते। इसलिए बड़े हथियार की जरूरत थी।