प्रज्ञा सिंह ठाकुर (फाइल फोटो)
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भोपाल की सांसद प्रज्ञा ठाकुर के एक और विवादास्पद बयान से भाजपा फिर से बैकफुट है। लोकसभा चुनाव के दौरान उनकी विवादास्पद टिप्पणी के बाद मामला अनुशासन समिति के पास भेजने की बात कही गई थी। हालांकि, तब से तीन बार अपने बयान से विवाद खड़ा कर चुकीं प्रज्ञा से जुड़ा कोई मामला भाजपा की अनुशासन समिति के पास नहीं है।
समिति की वरिष्ठ सदस्य विजोया चक्रवर्ती ने कहा कि प्रज्ञा से जुड़ा कोई मामला समिति के समक्ष नहीं लाया गया है। चुनाव प्रचार के दौरान जब प्रज्ञा ने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को ‘देशभक्त’ और मुंबई एटीएस के मुखिया की उनके श्राप के कारण मौत होने का दावा किया तो पीएम मोदी सहित भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व उनसे बेहद खफा हो गया था।
पार्टी ने उन्हें कारण बताओ नोटिस भेजने के साथ उनके मामले को पार्टी की अनुशासन समिति के पास भेजने की घोषणा की थी। गोडसे वाले बयान के बाद प्रज्ञा ने यह कहकर नेतृत्व की नाराजगी मोल ले ली कि वह शौचालय बनाने के लिए सांसद नहीं बनी हैं। इस पर कार्यवाहक अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उन्हें फटकार लगाई थी। अब उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की मौत का ठीकरा विपक्ष पर फोड़ते हुए दावा किया कि हताश विपक्ष पार्टी नेताओं के खिलाफ मारक शक्ति का प्रयोग कर रहा है।
प्रज्ञा से जुड़े मामले में जब ‘अमर उजाला’ ने अनुशासन समिति की सदस्य विजोया चक्रवर्ती से पूछा तो उन्होंने कहा कि समिति के समक्ष उनसे जुड़ा एक भी मामला नहीं भेजा गया है। जब कोई मामला आया ही नहीं है तो कार्रवाई की सिफारिश का सवाल ही कहां उठता है? समिति के दूसरे सदस्य सत्येंद्र सिंह ने कहा कि प्रज्ञा से जुड़ा मामला केंद्रीय नेतृत्व के पास है। इस पर केंद्रीय नेतृत्व को ही फैसला करना है।