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Life Mission Case: CM के पूर्व प्रधान सचिव शिवशंकर को जमानत नहीं; कोर्ट ने कहा- गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं

Thu, 13 Apr 2023 07:06 PM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पूर्व प्रधान सचिव एम शिव शंकर ने चिकित्सा आधार पर जमानत के लिए याचिका लगाई थी। इसे जस्टिस ए बदरुद्दीन खारिज कर दिया। जस्टिस बदरुद्दीन ने कहा कि जेल अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि शिव शंकर को उचित इलाज मुहैया की जाए।
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केरल हाईकोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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केरल हाईकोर्ट ने सीएम के पूर्व प्रमुख सचिव को जमानत देने से इनकार कर दिया है। पूर्व प्रमुख सचिव पर विदेशी योगदान अधिनियम के उल्लंघन का आरोप है। हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि पूर्व अधिकारी एम शिवशंकर को जमानत नहीं दी जा सकती, क्योंकि उनका सरकार में काफी प्रभाव था, खासकर मुख्यमंत्री पर।

पढ़िए, अदालत ने क्या कहा

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एम शिव शंकर ने चिकित्सा आधार पर जमानत के लिए याचिका लगाई थी। इसे जस्टिस ए बदरुद्दीन खारिज कर दिया। जस्टिस बदरुद्दीन ने कहा कि जेल अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि शिव शंकर को उचित इलाज मुहैया की जाए। कोर्ट ने माना कि शिव शंकर ऐसे व्यक्ति नहीं हैं, जो ट्रायल से भाग जाए। लेकिन याचिकाकर्ता का प्रभाव काफी ऊपर तक है। मुख्यमंत्री तक याचिकाकर्ता का प्रभाव है, इसलिए सबूत और गवाहों के साथ छेड़छाड़ की कोशिश हो सकती है।

कोर्ट ने कहा कि पहले हुई गिरफ्तारी के बाद जमानत हुए शिव शंकर को दोबारा सरकार ने बहाल किया। सेवानिवृत्त होने तक वह महत्वपूर्ण पदों पर पदस्थ भी रहा। सरकार ने गंभीर अपराधों में उनकी संलिप्तता को नजरअंदाज करते हुए बहाली दी थी। अदालत ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। स्वप्ना सुरेश सहित कई आरोपियों की गिरफ्तार बाकी है। कोर्ट ने कहा कि स्वप्ना की गिरफ्तारी में देरी क्यों हो रहा है, यह चिंता का विषय है।

पहले विशेष अदालत ने खारिज की थी जमानत याचिका 

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पिछले महीने एक विशेष ने एम शिवशंकर को जमानत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद शिव शंकर ने मामले में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन हाईकोर्ट ने भी जमानत देने से इनकार कर दिया। विशेष अदालत ने रिहा न करने का कारण बताते हुए कहा था कि अपराध की जांच शुरुआती दौर में हैं, इसलिए मामले की गंभीरता देखते हुए याचिका खारिज की जाती है।

यह है पूरा मामला
14 फरवरी को शिव शंकर को केरल सरकार की आवास परियोजना, लाइफ मिशन में एफसीआरए के उल्लंघन के आरोप में पकड़ा था। इस योजना के तहत केरल के बेघर लोगों को घर देने का प्लान था। मामले में आरोप है कि यूनिटेक बिल्डर ने  के लिए कॉन्ट्रैक्ट पाने के लिए शिवशंकर और यूएई राजदूत के एक अधिकारी को रिश्वत दी थी। मामले का खुलासा तब हुआ जब यूएई दूतावास के पूर्व कर्मचारी स्वप्ना सुरेश और सरिथ पीएस को ईडी और कस्टम ने सोने की तस्करी से जुड़े एक दूसरे मामले में गिरफ्तार किया था। 

2020 में सीबीआई ने कोच्चि की एक अदालत में धारा 120 बी और एफसीआरए के उल्लंघन के तहत यूनिटेक बिल्डर के प्रबंध निदेशक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। इसके अलावा संतोष इप्पन और कंपनी साने वेंचर्स को आरोपी बनाया गया है। जांच के दौर स्वप्ना सुरेश ने कथित रूप से स्वीकार किया था कि उसे 1 करोड़ रुपए मिले थे और वह पैसा शिव शंकर के लिए था।

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