विपक्षी दलों के विरोध के बावजूद सरकार ने 1 फरवरी को हो केंद्रीय बजट पेश करने का फैसला किया है। हालांकि इसमें चुनावी राज्यों से संबंधित घोषणाएं नहीं होंगी।
सरकार ने चुनाव आयोग के सामने पारंपरिक तौर पर बजट पेश किए जाने के समय से एक महीने पहले ही बजट पेश करने के अपने फैसले का पुरजोर बचाव करते हुए कहा कि उसने सितंबर 2016 में ही इसका इरादा जता दिया था।
अपना इरादा इतना पहले जाहिर करने के पीछे उसका मकसद नए वित्त वर्ष के पहले दिन से शुरू होने वाले निवेश चक्र को बरकरार रखना था। एक शीर्ष आधिकारिक सूत्र ने कहा कि 1 फरवरी को बजट पेश करने का फैसला पहले ही हो चुका था। हालांकि यह भी स्पष्ट है कि सरकार चुनावी राज्यों के लिए कोई खास घोषणा नहीं करने जा रही है।