भाजपा से गठबंधन टूटने के बाद राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) और शिवसेना के बीच एकता की कवायद को झटका लगा है। शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उनके पास गठबंधन का कोई प्रस्ताव नहीं आया है और शिवसेना किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं करेगी।
रविवार को मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने उद्धव ठाकरे के घर मातोश्री अपने पूर्व विधायक बाला नांदगावकर को दूत बनाकर भेजा था। बाला नांदगावकर ने मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव में शिवसेना और मनसे के बीच गठबंधन का प्रस्ताव दिया था। लेकिन, उद्धव ठाकरे ने मनसे के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है।
उद्धव ठाकरे ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि गठबंधन के लिए उनके पास कोई भी प्रस्ताव नहीं आया है। शिवसेना मुंबई सहित राज्य भर की दस महानगरपालिका और सभी जिला परिषद चुनाव अपने दम पर लड़ेगी। उद्धव ठाकरे ने कहा कि हम पूरी तैयारी के साथ चुनाव मैदान में उतरेंगे और संपूर्ण महाराष्ट्र में भगवा फहराएंगे।
उधर, मनसे की ओर से कहा गया है कि बाला नांदगावकर गठबंधन का प्रस्ताव लेकर मातोश्री पहुंचे थे, लेकिन उनकी उद्धव ठाकरे से चर्चा नहीं हो पाई थी। परन्तु, शिवसेना नेता व उद्योग मंत्री सुभाष देसाई से नांदगावकर की विस्तृत बातचीत हुई थी। ठाकरे बंधुओं के एक होने की खबर से दोनों दलों के कार्यकर्ता उत्साहित थे, लेकिन उद्धव ठाकरे के बयान से निराश हो गए। शिवसेना से अलग होने के बाद राज ठाकरे ने मनसे का गठन कर अपनी अलग राजनीति शुरू की थी।
जब से मनसे का गठन हुआ है तब से कई बार उद्धव और राज ठाकरे के मनोमिलन की चर्चा शुरू हुई लेकिन, दोनो भाईयों में एकता नहीं हो सकी। शिवसेना के वरिष्ठ नेता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मनोहर जोशी ने भी एकता का प्रयास किया था। उनका कहना है कि उद्धव और राज ठाकरे एकत्र आए तो इतिहास बन जाएगा। लेकिन, उद्धव ने राज से राजनीतिक रिश्ता जोड़ने से साफ इनकार कर दिया है।