चीनी विदेश मंत्री वांग यी की नेपाल यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच नौ समझौतों पर तो हस्ताक्षर हुए लेकिन बीआरआई परियोजना के लिए सहमति नहीं बन पाई। इस परियोजना को लेकर नेपाल ने सख्त रुख अपनाया है।
चीन के विदेश मंत्री वांग यी की नेपाल यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव (बीआरआई) परियोजनाओं और इससे संबंधित ऋणों पर सहमति नहीं बन पाई है। इस हिमालयी देश ने कहा है कि हम ऐसी किसी भी परियोजना को स्वीकार नहीं करेंगे जो चीन की शर्तों पर आधारित होगी।
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शनिवार को नेपाल के विदेश मंत्री नारायण खड़का और वांग यी के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता हुई ती। इसके बाद दोनों देशों के बीच नौ समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। ये समझौते आर्थिक और तकनीकी सहयोग और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय कारोबार पर प्रोटोकॉल्स समेत विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित हैं।
हालांकि, इनमें से कोई भी समझौता बीआरआई से जुड़ा हुआ नहीं था। प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के प्रचार मामलों के प्रमुख गोविंदा पेरियर ने कहा कि देश की आर्थिक प्राथमिकता पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने चीनी विदेश मंत्री से मुलाकात के दौरान कहा कि इस बिंदु पर नेपाल एक कर्ज को प्राथमिकता नहीं देता।
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उन्होंने चीन से एक अनुदान सहयोग के तहत और परियोजनाओं की मांग की। नेपाल ने बीआरआई फ्रेमवर्क समझौते पर मई 2017 में दस्तखत किए थे। लेकिन, विभिन्न समस्याओं के चलते एक भी परियोजना शुरू नहीं हो सकती है। इससे जुड़ी परियोजनाओं को लेकर स्थानीय लोगों ने भी विरोध-प्रदर्शन किया है।
वांग यी रविवार को नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी से भी मिले और द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। इसके अलावा वांग ने दो पूर्व प्रधानमंत्रियों, सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली और सीपीएन (माओवादी सेंटर) के अध्यक्ष पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' से अलग-अलग मुलाकात की।