एनएमसी के एथिक्स एंड मेडिकल रजिस्ट्रेशन बोर्ड की ओर से जारी निर्देशों में साफ कहा, लाइव सर्जरी का उद्देश्य सिर्फ शैक्षणिक होना चाहिए, न कि प्रचार या मुनाफे के लिए। नियमों के अनुसार, मरीजों से किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जाएगा और यदि कोई जटिलता आती है तो उसका इलाज मुफ्त किया जाएगा।
बड़ी कान्फ्रेंस में डॉक्टर अब मरीजों की लाइव सर्जरी नहीं दिखा पाएंगे। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने सभी मेडिकल कॉलेजों के लिए जारी आदेश में कहा है कि अब लाइव सर्जरी मुनाफे का मंच नहीं बनेंगी।
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एनएमसी के एथिक्स एंड मेडिकल रजिस्ट्रेशन बोर्ड की ओर से जारी निर्देशों में साफ कहा, लाइव सर्जरी का उद्देश्य सिर्फ शैक्षणिक होना चाहिए, न कि प्रचार या मुनाफे के लिए। नियमों के अनुसार, मरीजों से किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जाएगा और यदि कोई जटिलता आती है तो उसका इलाज मुफ्त किया जाएगा। पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल करने की जिम्मेदारी भी ऑपरेटिंग सर्जन की ही होगी। दरअसल एनएमसी के यह दिशा-निर्देश सुप्रीम कोर्ट में राहिल चौधरी बनाम भारत सरकार केस के तहत सामने आए हैं। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि मरीजों को बिना पर्याप्त जानकारी दिए लाइव सर्जरी में शामिल किया जा रहा है, जिससे कंपनियां अपने उत्पादों का प्रचार करती हैं। देश के कई निजी अस्पताल मरीजों को मॉडल बनाकर कॉन्फ्रेंसों में लाइव सर्जरी के जरिए उनका व्यावसायिक दोहन कर रहे हैं।