राजद नेता और पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन की जेल से रिहाई और रिहाई के बाद शुरू हुई बयानबाजी पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि वह बयान नहीं देते हैं बल्कि कार्रवाई करते हैं। यह कहकर नीतीश ने सूबे में बढ़ते अपराध और अपराधियों पर सख्ती बरतने का संकेत दिया है। राजद नेता और पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन की भागलपुर जेल से रिहाई और सीवान की कानून-व्यवस्था के सवाल पर नीतीश ने कहा,‘मैं बयान नहीं देता हूं बल्कि कार्रवाई करता हूं। आपराधिक प्रवृति के लोग अपराध करते रहते हैं, इसका मतलब ये नहीं है कि कानून फेल हो गया है। कानून अपनी सीमाओं में काम करता रहता है।’
सनद रहे कि जेल से निकलते ही शहाबुद्दीन ने नीतीश को परिस्थितिवश बनाए गए मुख्यमंत्री बताते हुए उनके नेतृत्व पर सवाल खड़े कर दिए थे। इस बीच जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह और पार्टी प्रवक्ता अजय आलोक ने सरकार का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार कभी भी दबाव में काम नहीं करती है और राजद भी कानून का राज चाहता है। उधर, शहाबुद्दीन के इस बयान से बैकफुट पर आए लालू प्रसाद ने भी कानून को सबसे के लिए समान बताया।
सीवान प्रशासन ने शहाबुद्दीन को जिले के लिए खतरा बताया है। वहीं प्रशांत भूषण जैसे नामी वकील का साथ मिलने के बाद अपने तीन बेटों को गंवाने वाले चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू एक बार फिर से अपनी लड़ाई जारी रखने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें न्याय चाहिए और जब तक वह जीवित हैं, इसके लिए लड़ते रहेंगे। मालूम हो कि शहाबुद्दीन को सीवान के बहुचर्चित तेजाब कांड में दो सगे भाइयों की हत्या के चश्मदीद गवाह राजीव रौशन की हत्या के मामले में पटना उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद भागलपुर जेल से रिहा कर दिया गया था।